Gopalganj: अपराधियों का ऐशगाह अब बना ‘टूरिस्ट स्पॉट’, एक किसान की जिद ने चंवर में ला दी जलक्रांति

Gopalganj News: बिहार के हथुआ प्रखंड स्थित रुपनचक चंवर की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। जिस जगह पर कभी अपराधियों का डेरा हुआ करता था, वहां अब पर्यटक मछलियों की अठखेलियों के बीच नौकायन का लुत्फ उठा सकेंगे। करीब 15 साल पहले एक बुजुर्ग किसान द्वारा शुरू की गई एक छोटी सी पहल ने आज इस पूरे इलाके को पर्यटन स्थल और स्वरोजगार के बड़े केंद्र में तब्दील कर दिया है। यह चंवर अब न केवल हरियाली से लबरेज है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक मजबूती का आधार भी बन गया है।

बंजर और कीचड़ भरी जमीन बनी वरदान

करीब 250 एकड़ में फैला रुपनचक चंवर तीन दशक पहले तक दर्जनों किसानों के लिए किसी बोझ से कम नहीं था। साल भर कीचड़ और पानी भरे रहने के कारण यहां खेती करना पूरी तरह असंभव था। लोग इस इलाके की ओर आने से कतराते थे क्योंकि यह अपराधियों की छिपने की जगह बन चुकी थी। लेकिन आज वही बेकार पड़ी जमीन सोना उगल रही है। ग्रामीण अब वहां अपनी जमीन पर खेती के बजाय उन्नत तकनीक से मत्स्य पालन कर रहे हैं, जिससे उनकी तकदीर बदल गई है।

अमीन की नौकरी छोड़ बदली गांव की सूरत

इस बदलाव की कहानी रुपनचक गांव के निवासी जयबहादुर सिंह से शुरू होती है। वे चकबंदी विभाग में अमीन के पद पर तैनात थे, लेकिन अपने गांव की बंजर जमीन को देख उन्होंने नौकरी छोड़ने का साहसिक फैसला लिया। शुरू में ग्रामीणों ने उनका मजाक उड़ाया और किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया। इसके बावजूद जयबहादुर ने हार नहीं मानी और अपनी डेढ़ बीघा जमीन पर तालाब बनाकर मछली पालन और सागवान के पौधे लगाने का काम शुरू किया। उनकी सफलता देख धीरे-धीरे पूरा गांव इस मुहिम से जुड़ गया।

70 एकड़ में फैले तालाब और मछली बीज केंद्र

आज इस चंवर के 70 एकड़ क्षेत्र में व्यवस्थित तालाब बनाए गए हैं, जहाँ बड़े पैमाने पर मछली पालन होता है। खास बात यह है कि यहां अब केवल मछलियां ही नहीं बेची जातीं, बल्कि आधुनिक हेचरी के जरिए मछली के बीज भी तैयार किए जा रहे हैं। यह चंवर अब गांव के दो दर्जन से अधिक परिवारों की आजीविका का मुख्य स्रोत बन चुका है। तालाबों में बतख पालन भी किया जा रहा है, जो किसानों की आय को दोगुना करने में मददगार साबित हो रहा है।

पर्यटन और हरियाली का नया संगम

रुपणचक चंवर की फिजा अब पूरी तरह बदल गई है। चंवर के चारों तरफ लगे हजारों पेड़ और तालाबों का नीला पानी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। स्थानीय स्तर पर इसे एक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां लोग प्राकृतिक शांति की तलाश में घूमने आते हैं। ग्रामीणों के साझा प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति दृढ़ हो, तो बेकार पड़ी दलदली जमीन को भी खुशहाली के रास्ते पर लाया जा सकता है। अब यह स्थान जिला प्रशासन के लिए भी गौरव का विषय बन गया है।

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