जमुई में सिस्टम ने ली जान: एंबुलेंस में खत्म हुआ डीजल, 44 डिग्री की गर्मी में तड़पकर मरीज ने तोड़ा दम

Jamui News: बिहार के जमुई जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। झाझा प्रखंड के बाबूबांक निवासी धीरज रविदास की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। पटना रेफर किए गए इस मरीज की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि रास्ते में एंबुलेंस का ईंधन खत्म हो गया था। भीषण गर्मी और 44 डिग्री के टॉर्चर के बीच एंबुलेंस सड़क किनारे खड़ी रही और दो घंटे तक तड़पने के बाद बीमार धीरज ने दम तोड़ दिया। यह घटना न केवल एंबुलेंस सेवा की लापरवाही है, बल्कि पूरे सरकारी तंत्र की विफलता का जीता-जागता उदाहरण है।

सिकंदरा स्वास्थ्य केंद्र के पास थमी सांसें

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जहां एंबुलेंस का ईंधन खत्म हुआ, वहां से सिकंदरा स्वास्थ्य केंद्र महज कुछ ही दूरी पर था। अगर एंबुलेंस कर्मी या संबंधित अधिकारियों ने थोड़ी भी सक्रियता दिखाई होती, तो मरीज को दूसरे वाहन से अस्पताल भेजा जा सकता था। लेकिन दो घंटे तक सिस्टम मूकदर्शक बना रहा। 102 एंबुलेंस का संचालन करने वाली ‘जेन प्लस’ कंपनी की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कंपनी के पास ईंधन भरने का कोई इमरजेंसी मानक नहीं है, जिसका खामियाजा एक गरीब परिवार को अपना मुखिया खोकर भुगतना पड़ा।

तेल के खेल में उलझी मरीजों की जिंदगी

जमुई में एंबुलेंस संचालन का नियम किसी सिरदर्द से कम नहीं है। एंबुलेंस में कितना ईंधन हमेशा रहना चाहिए, इसका कोई स्पष्ट मानक तय नहीं किया गया है। नियम के मुताबिक, जब मरीज को रेफर किया जाता है, तब कार्ड के आधार पर तय पेट्रोल पंप से ही तेल लेना होता है। अगर भारत पेट्रोलियम का कार्ड है, तो चालक किसी अन्य पंप से तेल नहीं ले सकता। अक्सर गंभीर मरीजों को एंबुलेंस में लिटाकर चालक 20 से 30 मिनट तक पेट्रोल पंप पर तेल लेने के लिए कतार में खड़ा रहता है, जो किसी भी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

पीड़ित बेटे ने सिविल सर्जन से मांगी इंसाफ की गुहार

मृतक के पुत्र अजीत दास ने सिविल सर्जन को लिखित आवेदन देकर न्याय की मांग की है। अजीत ने आरोप लगाया है कि उनके पिता की मौत का सीधा जिम्मेदार एंबुलेंस चालक और जेन प्लस कंपनी की मनमानी है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है। पीड़ित का कहना है कि अगर समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की जाती, तो उनके पिता आज जीवित होते। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में आक्रोश व्याप्त है।

दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी और शो-काज नोटिस

इस शर्मनाक घटना पर संज्ञान लेते हुए जमुई के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित एंबुलेंस कंपनी को ‘शो-काज’ (कारण बताओ) नोटिस जारी किया है। सिविल सर्जन ने बताया कि एंबुलेंस का संचालन पटना से नियंत्रित होता है, इसलिए मुख्य कार्यालय को भी इस लापरवाही की रिपोर्ट भेजी जाएगी। फिलहाल सदर अस्पताल में मौजूद आठ एंबुलेंस में से एक खराब बताई जा रही है, जिसे ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories