Delhi News: आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में अचानक विलय ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता आतिशी ने इस कदम को पूरी तरह असंवैधानिक करार देते हुए बीजेपी पर कड़ा प्रहार किया है। आतिशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी सत्ता का अंत अब करीब है। आप नेतृत्व ने इस विलय को लोकतंत्र और संविधान की हत्या बताया है।
आतिशी का तीखा वार: “जितना जुल्म करोगे, उतना बुरा हश्र होगा”
आतिशी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा किसी भी कीमत पर देश के संविधान को खत्म करना चाहती है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इतिहास गवाह है, जुल्म करने वालों का अंत हमेशा बुरा होता है। आतिशी के अनुसार, यह विलय दल-बदल विरोधी कानून का खुला उल्लंघन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए, वरना जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।
राघव चड्ढा की बगावत और 6 अन्य सांसदों का बीजेपी प्रेम
इस राजनीतिक उठापटक की शुरुआत 24 अप्रैल को हुई, जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बीजेपी की सदस्यता ली। उनके साथ संदीप पाठक और राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर अशोक मित्तल समेत कुल सात सांसदों ने पाला बदला है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की उपस्थिति में इन सभी नेताओं ने भगवा चोला ओढ़ लिया। राघव चड्ढा की इस बगावत को आम आदमी पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
राज्यसभा में बढ़ा एनडीए का दबदबा, बीजेपी का आंकड़ा 113 पार
उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन सातों सांसदों के बीजेपी में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राज्यसभा में बीजेपी की सदस्य संख्या बढ़कर 113 हो गई है। वहीं, एनडीए का कुल आंकड़ा 147 तक पहुंच चुका है, जो सरकार के लिए विधायी कार्यों में बड़ी राहत है। संख्या बल में इस भारी बढ़त ने विपक्षी खेमे, विशेषकर ‘इंडिया’ गठबंधन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
संजय सिंह ने जताई कड़ी आपत्ति, राज्यसभा सचिवालय को लिखा पत्र
आम आदमी पार्टी ने इस विलय प्रक्रिया पर गंभीर कानूनी सवाल उठाए हैं। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा सचिवालय को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मांगी है। संजय सिंह ने पूछा है कि आखिर किस आधार पर राघव चड्ढा और अन्य सांसदों के पत्रों को मंजूरी दी गई। पार्टी अब इस मामले को कानूनी रूप से चुनौती देने की तैयारी कर रही है ताकि इन सांसदों की सदस्यता रद्द कराई जा सके।
एनडीए की बढ़ती ताकत और विपक्ष के लिए नई चुनौतियां
सात सांसदों के शामिल होने के बाद राज्यसभा में शक्ति संतुलन पूरी तरह एनडीए के पक्ष में झुक गया है। इससे सरकार को महत्वपूर्ण बिल पास कराने में अब किसी बड़ी अड़चन का सामना नहीं करना पड़ेगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विलय न केवल आप को कमजोर करेगा, बल्कि भविष्य के चुनावों में भी इसके दूरगामी परिणाम होंगे। फिलहाल, राजधानी की सियासत इस ‘विलय’ और ‘बगावत’ के बीच नए समीकरण तलाश रही है।


