हिमाचल पूर्ण साक्षर राज्य! लेकिन ‘अंगूठा टेक’ भी लड़ सकता है पंचायत चुनाव, जानिए सरकार के चौंकाने वाले नियम

Himachal News: हिमाचल प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया जा चुका है। लेकिन राज्य में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव लड़ने के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता जरूरी नहीं है। यहां अनपढ़ व्यक्ति भी आसानी से चुनाव मैदान में उतर सकता है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सबको समान अवसर देने के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत अमीर, गरीब, पढ़े-लिखे या अनपढ़ सभी लोग राजनीति में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं।

समान अवसर के लिए शैक्षिक योग्यता की शर्त नहीं

हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम में उम्मीदवारों के लिए शिक्षा की कोई शर्त नहीं रखी गई है। नगर निकाय चुनाव अधिनियम में भी यह नियम लागू है। चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना काफी है। इसके अलावा आयु और मतदाता पंजीकरण जैसी सामान्य शर्तें पूरी करनी होती हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व का पूरा मौका देना है।

स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव लड़ने के जरूरी नियम

स्थानीय चुनाव लड़ने के लिए कुछ बुनियादी नियम तय किए गए हैं। इनका पालन करना हर उम्मीदवार के लिए जरूरी है।

  • उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना सबसे जरूरी शर्त है।
  • पंचायत और शहरी निकाय चुनाव के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष है।
  • उम्मीदवार का नाम संबंधित क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए।
  • आरक्षित सीटों के लिए संबंधित वर्ग का वैध प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है।

ये गलतियां करने पर छिन जाएगी चुनाव लड़ने की पावर

चुनाव आयोग ने अयोग्यता को लेकर भी सख्त नियम बनाए हैं। अगर किसी व्यक्ति को अदालत ने गंभीर अपराध में दोषी ठहराया है, तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता। मानसिक रूप से अस्वस्थ या अघोषित दिवालिया व्यक्ति भी चुनाव प्रक्रिया से बाहर रहेंगे। यदि उम्मीदवार पर सरकारी बकाया जैसे बिजली, पानी या पंचायत टैक्स है, तो उसका नामांकन रद्द हो जाएगा। इसके अलावा भ्रष्ट आचरण और चुनावी अपराध करने पर भी सख्त रोक है।

नामांकन पत्र और हलफनामे में जानकारी छिपाना पड़ेगा भारी

चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपना नामांकन पत्र बिल्कुल सही तरीके से भरना होता है। शपथ पत्र में अपनी संपत्ति का पूरा विवरण देना जरूरी है। अगर कोई उम्मीदवार अपने आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाता है, तो उसे तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। चुनाव के दौरान खर्च की तय सीमा का सख्ती से पालन करना होता है। इसके साथ ही आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई होती है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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