Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने महिलाओं के हित में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय तक साथ रहने वाली दूसरी पत्नी भी पारिवारिक पेंशन की पूरी हकदार है। महिला और पुरुष का सालों तक पति-पत्नी की तरह रहना अनैतिक नहीं है। शादी कानूनी रूप से अमान्य होने पर भी महिला को पेंशन से वंचित नहीं कर सकते। इस अहम फैसले से बेसहारा महिलाओं को बड़ी राहत मिली है।
तकनीकी आधार पर पेंशन रोकना गलत
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी ने यह आदेश दिया है। अदालत ने माना कि पेंशन का मुख्य काम भरण-पोषण करना है। हर महिला को आत्मसम्मान से जीने का अधिकार है। लंबे समय तक पुरुष पर निर्भर रहने वाली महिला को बेसहारा नहीं छोड़ सकते। उसे तकनीकी आधार पर पेंशन ना देना भुखमरी की तरफ धकेलने जैसा है। इसलिए हाई कोर्ट ने महिला को बकाया सहित पूरी पेंशन देने का आदेश दिया है।
दूसरी शादी अवैध हो सकती है, अनैतिक नहीं
अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5(i) का जिक्र किया है। जज ने साफ कहा कि कानून के तहत दूसरी शादी बेशक अवैध हो सकती है। लेकिन समाज की नजरों में इस रिश्ते को अनैतिक नहीं कह सकते। ऐसी शादियों में महिला को गुजारा भत्ता मांगने का कानूनी अधिकार हमेशा मिलता है। ठीक उसी तरह पति की मौत के बाद उसे पारिवारिक पेंशन पाने का भी पूरा हक है। इन दोनों अधिकारों का सीधा मकसद आर्थिक सुरक्षा देना है।
पति ने सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज किया था नाम
सुनवाई के दौरान अदालत ने कई अहम तथ्य पाए। अपीलकर्ता और रिटायर्ड फोरमैन साल 1994 से 2006 तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे थे। पति ने जीवित रहते हुए महिला का नाम सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज करवाया था। बाद में विवादों के कारण इसे हटाने की कोशिश हुई थी। इस मामले में कर्मचारी की पहली पत्नी का निधन पहले ही हो चुका है। उसके बच्चों ने भी पारिवारिक पेंशन पर अपना कोई दावा पेश नहीं किया है।
