West Bengal News: पश्चिम बंगाल की सत्ता में हुए बड़े बदलाव के साथ ही अब प्रशासनिक गलियारों से विद्रोह और असंतोष के स्वर खुलकर सामने आने लगे हैं। राज्य सरकार के बेहद करीबी माने जाने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी और हिडको (HIDCO) के पूर्व चेयरमैन देबाशीष सेन ने इंटरनेट मीडिया पर एक विस्फोटक पोस्ट साझा कर राजनीतिक हलकों में सनसनी फैला दी है। उन्होंने रवींद्र संगीत की प्रसिद्ध पंक्तियों के जरिए पिछले दो वर्षों में झेले गए अपने मानसिक उत्पीड़न और सख्त सरकारी निगरानी का पूरा कच्चा चिट्ठा सार्वजनिक कर दिया है।
सेवानिवृत्ति के बाद की कड़ी निगरानी का खुलासा
देबाशीष सेन ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें न्यूटाउन जैसे प्रमुख इलाके में एक सामान्य नागरिक की तरह प्रवेश करने से भी रोका गया था। उनके अनुसार, उन पर चौबीसों घंटे सर्विलांस (निगरानी) रखी जाती थी। पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल कर उनके दोस्तों और करीबियों को धमकाया जाता था कि वे उनसे किसी भी तरह का संपर्क न रखें। यह खुलासा दर्शाता है कि पूर्ववर्ती शासन के दौरान शीर्ष नौकरशाहों पर किस तरह का दबाव और नियंत्रण बनाया गया था।
सार्वजनिक कार्यक्रमों से बाहर रखने का षड्यंत्र
इको पार्क और सौर गुंबद जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के शिल्पकार माने जाने वाले सेन ने अपना दुख साझा किया है। उन्होंने बताया कि जिन परियोजनाओं को उन्होंने खून-पसीने से सींचा, उनके उद्घाटन समारोहों तक में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। उन पर अघोषित प्रतिबंध लागू था और निजी संस्थानों को भी मजबूर किया जाता था कि वे सेन को किसी सार्वजनिक मंच पर न बुलाएं। इस अपमानजनक व्यवहार ने उन्हें अपने ही शहर में एक अजनबी और एकाकी नागरिक बना दिया था।
सत्ता परिवर्तन को बताया ‘मुक्ति का सवेरा’
देबाशीष सेन के अनुसार, पिछले दो साल उन्होंने घटिया ट्रोलर्स और सरकारी मशीनरी के भारी दबाव के बीच एकांत में गुजारे हैं। अब राज्य में भाजपा की जीत और सत्ता परिवर्तन के बाद उन्होंने इसे अपनी निजी मुक्ति के रूप में देखा है। उन्होंने लिखा कि अब बंद दरवाजे खुल गए हैं और वह फिर से एक स्वतंत्र नागरिक की तरह गरिमापूर्ण जीवन जी सकेंगे। प्रशासनिक हलकों में सेन का यह बयान अब एक बड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गया है।


