West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में राजनीतिक हिंसा का दौर फिर से शुरू हो गया है। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सचिव चंद्रनाथ रथ की निर्मम हत्या के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा ने इस घटना को बंगाल में व्याप्त ‘माफिया संस्कृति’ और ‘महाजंगल राज’ का नतीजा बताया है। पार्टी का आरोप है कि यह हत्या राज्य में ‘संस्थागत’ चुनावी हिंसा का जीता-जागता प्रमाण है, जहां विरोधियों को रास्ते से हटाया जा रहा है।
हार की बौखलाहट में खूनी खेल: शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस हत्याकांड की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह बौखला गई है। चौहान ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए, लेकिन हार से घबराकर टीएमसी अब खूनी खेल पर उतर आई है। उन्होंने बंगाल की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
लोकतंत्र पर सीधा प्रहार और रक्तरंजित संस्कृति
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस घटना को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि ममता बनर्जी के शासनकाल में ‘रक्त रंजित राजनीतिक संस्कृति’ को जानबूझकर बढ़ावा दिया गया। प्रधान के अनुसार, बंगाल की सत्ता हाथ से खिसकता देख टीएमसी अपने सबसे क्रूर और हिंसक रूप में सामने आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में अब असहमति और विरोध का जवाब केवल हत्या और हिंसा से दिया जा रहा है।
हिंसा को संस्थागत रूप देने का आरोप
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इसे ‘खेला होबे’ का असली राजनीतिक मॉडल बताया है। वहीं, पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों के दौरान बंगाल में राजनीतिक हिंसा को पूरी तरह संस्थागत बना दिया गया है। भाजपा नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब भी टीएमसी को चुनावी झटका लगता है, वह भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निशाना बनाना शुरू कर देती है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि अब इसे और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेष पर्यवेक्षकों को दायित्वों से किया गया मुक्त
बंगाल विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से संपन्न होने के बाद निर्वाचन आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने गुरुवार को विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता और विशेष पुलिस पर्यवेक्षक एनके मिश्रा को उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया है। सुब्रत गुप्ता को पहले रोल ऑब्जर्वर और फिर चुनाव के दौरान विशेष पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं, पूर्व आईपीएस एनके मिश्रा कानून-व्यवस्था की निगरानी कर रहे थे। आयोग के इस कदम को नई सरकार के गठन की दिशा में अंतिम प्रक्रिया माना जा रहा है।


