International News: वैश्विक तेल बाजार पर अमेरिका-ईरान तनाव का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अमेरिका ने एक अहम फैसला लिया है। उसने रूसी तेल खरीद पर फिर से अस्थायी छूट देने का ऐलान किया है। यह छूट 30 दिनों के लिए है। खास बात यह है कि महज दो दिन पहले अमेरिका ने कोई रियायत देने से इनकार कर दिया था। अब उसने भारत समेत दुनिया के कई देशों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत दे दी है। हालांकि ईरानी तेल पर छूट खत्म कर दी गई है।
48 घंटे में पलटी अमेरिका की नीति, 15 अप्रैल को कहा था नहीं
15 अप्रैल 2026 को अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने साफ कहा था कि रूस और ईरान दोनों के लिए छूट आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। लेकिन 17 अप्रैल को ट्रेजरी विभाग ने नया ‘जनरल लाइसेंस’ जारी कर दिया। इसके तहत जो रूसी तेल 17 अप्रैल या उससे पहले जहाजों में लोड हो चुका है, उसे 16 मई तक खरीदा जा सकता है। यानी करीब एक महीने की मोहलत। यह यू-टर्न ने दुनिया को चौंका दिया। अमेरिका पर घरेलू कीमतों का दबाव था, जिसके चलते उसे यह कदम उठाना पड़ा।
भारत को मिली बड़ी राहत, 30 मिलियन बैरल तेल के ऑर्डर पहले से
भारत इस फैसले से सबसे ज्यादा लाभान्वित होने वाले देशों में है। अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद भारत ने अपनी जरूरतों के लिए रूस का रुख किया था। रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने पहले ही रूस से करीब 30 मिलियन बैरल तेल के ऑर्डर दे दिए थे। रिलायंस जैसी कंपनियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से रूसी कंपनियों से दूरी बना ली थी। अब इस छूट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऑक्सीजन का काम किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पहले ही कहा था कि भारत की ऊर्जा नीति 140 करोड़ लोगों की जरूरतों पर आधारित है।
ईरान पर दबाव जारी, रूस को राहत; अमेरिकी कांग्रेस में विरोध
अमेरिका ने रूसी तेल पर नरमी तो दिखाई, लेकिन ईरानी तेल खरीद की छूट पूरी तरह खत्म कर दी। यह साफ संकेत है कि अमेरिका ईरान पर अपना दबाव बरकरार रखना चाहता है। इस फैसले के खिलाफ अमेरिकी कांग्रेस में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल ने इसे रूसी ‘वॉर मशीन’ को फंड देने वाला बताया। कांग्रेस सदस्य ग्रेगरी मीक्स और विलियम कीटिंग ने छूट खत्म करने के लिए विधेयक पेश किया है। उनका कहना है कि रूस यूक्रेन में तबाही मचा रहा है और ईरान की मदद कर रहा है।
तेल की कीमतों पर क्या असर? 16 मई के बाद अनिश्चितता बरकरार
इस छूट से वैश्विक सप्लाई बनी रहेगी, जिससे तेल की कीमतों में अचानक उछाल नहीं आएगा। अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं। ट्रंप प्रशासन ने महंगाई को काबू रखने के लिए यह ‘मिडिल पाथ’ अपनाया है। लेकिन यह राहत सिर्फ 30 दिन की है। 16 मई के बाद छूट बढ़ेगी या सख्ती होगी, यह फिलहाल साफ नहीं है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर कीमतें फिर तेजी पकड़ सकती हैं। फिलहाल भारत जैसे देशों ने राहत की सांस ली है, लेकिन अनिश्चितता अभी बनी हुई है।
