मैकाले की शिक्षा पद्धति को उखाड़ फेंकेगा भारतीय शिक्षा बोर्ड, स्वामी रामदेव बोले- ‘हमारे पूर्वज और ज्ञान परंपरा एक’

Lucknow News: योग गुरु स्वामी रामदेव ने मंगलवार को लखनऊ के गोलागंज में ‘भारतीय शिक्षा बोर्ड’ के प्रांतीय कार्यालय का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने एक बड़ा वैचारिक संदेश दिया। स्वामी रामदेव ने कहा कि हम सभी की जाति, धर्म या पंथ भले ही अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारे पूर्वज और उनकी महान ज्ञान परंपरा एक ही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विभिन्न मुद्दों पर मतभेद होना स्वाभाविक है, परंतु हमारे भीतर ‘राष्ट्रधर्म’ हमेशा सर्वोपरि होना चाहिए।

मैकाले की शिक्षा पद्धति पर कड़ा प्रहार

स्वामी रामदेव ने भारत की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर बात करते हुए ब्रिटिश शासन काल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1835 में लॉर्ड मैकाले ने भारत में जिस औपनिवेशिक शिक्षा की नींव रखी थी, उसने देश की सांस्कृतिक जड़ों को हिलाकर रख दिया। रामदेव के अनुसार, जिस तरह आज मैकाले के ‘पाप’ को याद किया जाता है, भविष्य में भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन एनपी सिंह के पुरुषार्थ को सम्मान के साथ याद किया जाएगा। उन्होंने शिक्षकों से इतिहास की भूलों को न दोहराने की अपील की।

एक लाख स्कूलों को बोर्ड से जोड़ने का महालक्ष्य

भारतीय शिक्षा बोर्ड के भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए स्वामी रामदेव ने बताया कि उनका लक्ष्य देश भर के एक लाख विद्यालयों को इस बोर्ड से जोड़ना है। इस मुहिम में उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी हिस्सेदारी होगी। उन्होंने इसे ‘शिक्षा की क्रांति’ करार देते हुए कहा कि जिस तरह योग ने पूरी दुनिया को एक नई दिशा दी है, उसी तरह भारतीय शिक्षा पद्धति भी विश्व का मार्गदर्शन करेगी। यह बोर्ड लोगों को वैचारिक और आर्थिक गुलामी से पूर्ण मुक्ति दिलाएगा।

कक्षा एक से पढ़ाई जाएगी आत्मरक्षा: अवध ओझा

समारोह में प्रसिद्ध शिक्षाविद् अवध ओझा ने बोर्ड की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में कक्षा एक से ही विद्यार्थियों को ‘आत्मरक्षा का विज्ञान’ पढ़ाया जाएगा। यह बोर्ड केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छात्रों की अंतरात्मा और चेतना को जगाने का प्रयास करेगा। बोर्ड के चेयरमैन एनपी सिंह ने भी स्पष्ट किया कि वे आधुनिक शिक्षा में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का समन्वय कर रहे हैं ताकि शिक्षा पूरी तरह ‘भारतीय’ हो सके।

पाश्चात्य शिक्षा से नैतिकता को खतरा: गुलाब देवी

उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कार्यक्रम में पाश्चात्य शिक्षा के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्रिश्चियन कॉलेजों में दी जा रही विदेशी शिक्षा पद्धति से विद्यार्थियों की नैतिकता और संस्कार समाप्त हो रहे हैं। मंत्री ने स्वामी रामदेव के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को नैतिकता, मर्यादा और अनुशासन से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों के साथ कोमल व्यवहार करने और उन्हें संस्कारित बनाने का आह्वान किया।

भारतीयता और आधुनिकता का अनूठा संगम

भारतीय शिक्षा बोर्ड का मुख्य उद्देश्य आधुनिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा को प्राचीन वैदिक ज्ञान के साथ जोड़ना है। विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि यह बोर्ड देश को एक नई और सकारात्मक दिशा देने में मील का पत्थर साबित होगा। इस प्रांतीय कार्यालय के खुलने से उत्तर प्रदेश के हजारों स्कूलों के लिए भारतीय शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेने और अपनी शिक्षण पद्धति में सुधार करने का रास्ता साफ हो गया है। कार्यक्रम में कई दिग्गज शिक्षाविद् और आचार्य भी मौजूद रहे।

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