Entertainment News: अभिनेत्री काजोल ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान अपनी बेटी न्यासा के साथ अपने रिश्ते की मुश्किलों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि जब न्यासा 12 साल की हुईं तो हार्मोनल बदलाव और बढ़ती उम्र के कारण आपसी तकरार बहुत बढ़ गई। लगातार तीन साल तक मां-बेटी के बीच हर छोटी-बड़ी बात पर बहस होती थी। हालांकि, काजोल ने समझदारी दिखाकर रिश्ते को संवारा और आज दोनों के बीच गहरी बॉन्डिंग है।
जब हार्मोनल बदलाव ने बिगाड़ा रिश्ता
काजोल बताती हैं कि एक लड़की का जीवन बहुत मुश्किलों भरा होता है। मां-बेटी के रिश्ते में सबसे खराब दौर तब आया जब न्यासा 12 साल की पहुंची। इस उम्र में हार्मोन्स का असर और किशोरावस्था की चुनौतियां दोनों पर हावी हो गईं। काजोल ने कहा कि उस समय वे दोनों ही हर छोटी-छोटी बात को लेकर आपस में भिड़ जाते थे। दोनों ही बेहद इरेशनल और इललॉजिकल हो जाते थे, जिससे रिश्ते में लगातार तनाव बना रहता था।
तीन साल तक चली जबरदस्त खींचतान
एक्ट्रेस ने माना कि उनकी बेटी के साथ झगड़ों का दौर करीब तीन साल तक चला। हालात इस कदर बिगड़ गए थे कि दोनों एक-दूसरे की बात सुनने या समझने को तैयार नहीं थे। घर का माहौल बेहद तनावपूर्ण बना रहता था। इस स्थिति ने काजोल को अंदर तक झकझोर दिया और उन्हें लगा कि रिश्ता बचाने के लिए उन्हें खुद पहल करनी होगी क्योंकि वह एक अनुभवी मां हैं।
काजोल ने उठाया समझदारी भरा कदम
एक वयस्क और मां होने के नाते, काजोल को एहसास हुआ कि उन्हें एक कदम पीछे हटना होगा। उन्होंने तय किया कि वह अब न्यासा से उतनी लड़ाई नहीं करेंगी। काजोल ने अपनी बेटी के साथ बातचीत का तरीका पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने जितना हो सके न्यासा के साथ बैठना और बात करना शुरू किया। काजोल का मानना है कि पेरेंटिंग का मतलब सिर्फ बच्चों को आदेश देना नहीं है, बल्कि उनकी बात सुनना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

बोलने से ज्यादा सुनना है जरूरी
काजोल का मानना है कि पेरेंट्स के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपने बच्चों की बात ध्यान से सुनें। खासकर अगर आपका बच्चा टीनएजर है तो सुनने की यह आदत रिश्ते को मजबूत करती है। अपनी बात कहने से पहले बच्चों को महसूस करवाएं कि आप उनके साथ हैं। इससे बच्चे खुलकर अपने मन की बात कह पाते हैं और गलतफहमियां अपने आप दूर होने लगती हैं।
बच्चों को स्पेस और समय देना है बहुत जरूरी
काजोल ने यह भी सीखा कि बच्चों को अपनी बात रखने और खुद को समझने के लिए पर्याप्त स्पेस देना जरूरी है। इससे बच्चा स्वतंत्र महसूस करता है और माता-पिता पर भरोसा करने लगता है। कोई भी रिश्ता एक दिन में नहीं सुधरता इसलिए धैर्य और समय देना बेहद अहम है। काजोल ने कहा कि एक अभिभावक के तौर पर कभी-कभी शांत रहना और अपना अहंकार पीछे रखना रिश्ते को टूटने से बचा सकता है।
