Delhi News: मशहूर गायक कैलाश खेर ने दिल्ली में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान मंच पर गाने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने संगीतकारों के प्रति समाज के नजरिए पर कड़ा ऐतराज जताया और दर्शकों से ऐसी फरमाइश न करने की अपील की। खेर ने दो टूक शब्दों में कहा कि कलाकारों को केवल मनोरंजन का साधन या ‘मसखरा’ नहीं समझना चाहिए। उनके इस सख्त रुख और बेबाक बयान का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
गायक बोले- संगीत साधक की साधना है, मनोरंजन नहीं
समारोह के दौरान जब कैलाश खेर से कुछ पंक्तियां गुनगुनाने का अनुरोध किया गया, तो वे असहज हो गए। उन्होंने तर्क दिया कि संगीत एक साधना है और इसे महज ‘मूड बनाने’ का जरिया नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यही वह सोच है जिसे मैं बदलना चाहता हूं। गायक को इस तरह पेश न करें कि वह बस दो लाइन गाकर मनोरंजन कर दे। यह पूरी तरह गलत है और भविष्य में मुझसे ऐसा अनुरोध कतई न करें।”
तेंदुलकर और सैनिकों का उदाहरण देकर समझाया महत्व
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए कैलाश खेर ने क्रिकेट और सेना का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई सचिन तेंदुलकर से बीच रास्ते में छक्का मारने को कहता है? उन्होंने यह भी कहा कि क्या कोई सैनिक से अचानक अपनी पोजीशन लेकर गोली चलाने का अनुरोध करता है? खेर के मुताबिक, जब अन्य पेशेवरों से ऐसी मांग नहीं की जाती, तो फिर कलाकारों को ही मनोरंजन करने के लिए मजबूर क्यों किया जाता है।
साफ-सुथरे और तहजीब वाले संगीत के पक्षधर हैं खेर
कैलाश खेर हमेशा से ही भारतीय संगीत की मौलिकता और तहजीब के समर्थक रहे हैं। उन्होंने पूर्व में एक साक्षात्कार के दौरान फिल्म जगत के आधुनिक संगीत को ‘चाट मसाला’ और ‘खिचड़ी’ करार दिया था। वे मानते हैं कि संगीत में गरिमा होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फिल्म उद्योग ने उन्हें पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है। वे उन अवसरों के लिए हमेशा ईश्वर और फिल्म जगत के प्रति आभारी रहते हैं।
दो दशक का शानदार सफर और यादगार हिट गाने
कैलाश खेर ने साल 2003 में संगीत की दुनिया में कदम रखा था और बहुत कम समय में अपनी अलग पहचान बना ली। उनकी अनूठी आवाज ने ‘तेरी दीवानी’, ‘सैयां’ और ‘यूं ही चला चल’ जैसे गानों को कालजयी बना दिया है। उनके प्रशंसक उन्हें एक गंभीर कलाकार के रूप में देखते हैं। शनिवार को दिल्ली के कार्यक्रम में उनका यह बयान संगीत जगत में कलाकारों के सम्मान और उनकी स्थिति पर एक नई बहस छेड़ सकता है।
