Himachal News: हिमाचल प्रदेश के चर्चित सिया हत्याकांड की जांच अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। मंडी पुलिस ने 45 दिनों के भीतर अदालत में चालान पेश करने के लिए कसरत तेज कर दी है। पुलिस अब केवल आरएफएसएल की केमिकल और अन्य तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। साक्ष्यों को वैज्ञानिक ढंग से सत्यापित किया जा रहा है ताकि आरोपी को बच निकलने का कोई रास्ता न मिले। पुलिस की यह तत्परता दर्शाती है कि मामले को फास्ट ट्रैक पर ले जाया जा रहा है।
वैज्ञानिक साक्ष्यों और कॉल डिटेल से कसी गई घेराबंदी
पुलिस टीम ने घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों का मिलान आरोपी के बयानों से किया है। कातिल की गतिविधियों की एक सटीक टाइमलाइन तैयार की गई है। इसमें कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन ने अहम भूमिका निभाई है। घटनास्थल और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज का भी गहरा विश्लेषण हुआ है। इन कड़ियों को जोड़ने से हत्या के समय आरोपी की मौजूदगी पूरी तरह साबित हो गई है। तकनीकी सत्यापन से अभियोजन पक्ष का केस काफी मजबूत होने का दावा किया जा रहा है।
35 लोगों से पूछताछ और बाबा पर भी पुलिस का शिकंजा
मंडी पुलिस अब तक आरोपी विकास पटियाल के तमाम संपर्कों को खंगाल चुकी है। जांच का दायरा इतना विस्तृत था कि पुलिस ने एक संदिग्ध बाबा से भी कड़ी पूछताछ की। अब तक करीब 30 से 35 लोगों से पूछताछ पूरी हो चुकी है। इनमें से 12 से 15 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक मंडी विनोद कुमार ने पुष्टि की है कि फॉरेंसिक और डिजिटल सबूतों को ही सजा दिलाने का मुख्य आधार बनाया जा रहा है।
बेरहमी की वो सुबह: क्या था पूरा सिया हत्याकांड?
यह खौफनाक वारदात 13 अप्रैल 2026 की सुबह मंडी जिले के सरकाघाट में हुई थी। नैण गांव की 19 वर्षीय कॉलेज छात्रा सिया गुलेरिया हमेशा की तरह घर से कॉलेज के लिए निकली थी। वह बस स्टॉप की ओर पैदल जा रही थी कि रास्ते में आरोपी ने उसे रोक लिया। आरोपी ने तेजधार हथियार से सिया का गला रेत दिया। छात्रा की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस वारदात ने पूरे हिमाचल प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था और जनता न्याय की मांग कर रही है।
परिजनों के संपर्क में पुलिस, ठोस चार्जशीट की तैयारी
दस्तावेजी जांच के दौरान पुलिस लगातार पीड़ित परिवार के साथ संपर्क बनाए हुए है। जांच अधिकारियों का मुख्य लक्ष्य लंबित तकनीकी रिपोर्ट प्राप्त होते ही चालान पेश करना है। पुलिस का दावा है कि चार्जशीट में कोई भी कानूनी खामी नहीं छोड़ी जाएगी। इससे ट्रायल के दौरान आरोपी विकास पटियाल के खिलाफ ठोस केस पेश किया जा सकेगा। फिलहाल पुलिस डिजिटल साक्ष्यों को अंतिम रूप देने में जुटी है। जनता और प्रशासन दोनों की निगाहें अब अदालत में होने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
