Himachal News: हिमाचल प्रदेश की महत्वाकांक्षी ‘हिमकेयर’ स्वास्थ्य योजना में करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े ने सबको हैरान कर दिया है। विजिलेंस ब्यूरो ने इस घोटाले की गहराई से जांच के लिए आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। आईजी बिमल गुप्ता इस कमेटी की कमान संभालेंगे। शुरुआती अनुमान के मुताबिक यह कथित घपला 110 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। यह टीम अब अस्पतालों की बिलिंग प्रक्रिया और संदिग्ध भुगतानों की बारीकी से पड़ताल करेगी।
पुरुषों के ऑपरेशन के नाम पर ठगी, विजिलेंस ने जुटाए सबूत
इस घोटाले में धोखाधड़ी की सारी हदें पार कर दी गईं। जांच में सामने आया कि कुछ अस्पतालों ने हिमकेयर योजना के तहत चार पुरुषों की बच्चेदानी के ऑपरेशन तक कागजों में दिखा दिए। इसके अलावा 25 हजार रुपये में होने वाले हर्निया के ऑपरेशन का बिल एक लाख रुपये तक बनाया गया। विजिलेंस ने सचिवालय से संदिग्ध मरीजों के मेडिकल बिलों का पूरा रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिया है। फर्जी बिलों के जरिए सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई गई है।
जांच के घेरे में 35 निजी अस्पताल, मुख्यमंत्री ने लिया था संज्ञान
विजिलेंस की रडार पर हिमाचल और बाहरी राज्यों के करीब 35 निजी अस्पताल हैं। मुख्यमंत्री ने इसी साल मार्च में बजट सत्र के दौरान इस गड़बड़झाले का मामला सदन में उठाया था। उन्होंने उसी समय मामले की विजिलेंस जांच कराने का बड़ा एलान किया था। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी धांधली रोकने के लिए सचिवालय में तीन सदस्यीय विशेष कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी अब हर मेडिकल बिल की गहनता से जांच करेगी।
दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई, अस्पतालों पर लटकी तलवार
एसआईटी में एएसपी नरवीर सिंह समेत कई अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह टीम यह भी जांचेगी कि ऑपरेशन के दौरान जानबूझकर ज्यादा दवाइयां और महंगे उपकरण क्यों दिखाए गए। सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इस लूट में शामिल किसी भी अधिकारी या अस्पताल प्रबंधन को बख्शा नहीं जाएगा। जांच पूरी होते ही दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विजिलेंस की इस सक्रियता से भ्रष्ट अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
