हिमाचल बोर्ड में राजमिस्त्री की बेटी का कमाल: 99.29% अंक लाकर गाड़े सफलता के झंडे, अब बनना चाहती है इंजीनियर

Himachal News: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में रोहड़ू की बेटियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। साधारण परिवारों से आने वाली इन मेधावी छात्राओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद टॉप-10 की सूची में अपना नाम दर्ज कराया है। रोहड़ू की साक्षी कुमारी ने 99.29 फीसदी अंकों के साथ प्रदेश भर में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। वहीं, रमनप्रीत ने आठवां रैंक हासिल कर अपने क्षेत्र और परिवार का नाम रोशन किया है।

राजमिस्त्री की बेटी साक्षी ने अभावों को दी मात

साक्षी कुमारी की सफलता की कहानी संघर्ष और अटूट मेहनत की मिसाल है। उनके पिता भूपेंद्र शर्मा पेशे से एक राजमिस्त्री हैं और माता रंजू देवी सिलाई का काम करती हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के पबाई गांव का यह परिवार रोजगार की तलाश में रोहड़ू आकर बस गया था। साक्षी ने अपनी मेहनत के दम पर 700 में से 695 अंक अर्जित किए हैं। उनकी इस उपलब्धि पर पूरा परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

बेटी की उपलब्धि देख भावुक हुई मां

साक्षी की मां रंजू देवी अपनी बेटी के शानदार प्रदर्शन को देखकर भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी भी साक्षी पर पढ़ाई के लिए दबाव नहीं बनाया। साक्षी स्वयं ही अनुशासन के साथ अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता देती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति भले ही सामान्य हो, लेकिन उन्होंने बेटी की शिक्षा में कभी कोई कमी नहीं आने दी। साक्षी अब नॉन-मेडिकल विषय चुनकर भविष्य में एक कुशल इंजीनियर बनना चाहती हैं।

रमनप्रीत ने आठवां रैंक पाकर बढ़ाया मान

रोहड़ू की ही रमनप्रीत ने भी बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए आठवां स्थान हासिल किया है। उन्होंने 700 में से 692 अंक प्राप्त कर अपनी मेधा का परिचय दिया। रमनप्रीत के पिता कुलदीप चंद ऊना जिले के रहने वाले हैं और वर्तमान में रोहड़ू में अपना छोटा व्यवसाय चलाते हैं। रमनप्रीत ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। वह अपनी पढ़ाई से संतुष्ट और उत्साहित हैं।

भाषण की शौकीन रमनप्रीत का भी है इंजीनियर बनने का सपना

रमनप्रीत को बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ पाठ्येतर गतिविधियों में गहरी रुचि रही है। उन्हें मंच पर भाषण देना बेहद पसंद है और वह आगे भी अपनी इस रुचि को बरकरार रखना चाहती हैं। पढ़ाई को लेकर उनका लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है। वह भी भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती हैं। उनका मानना है कि शिक्षकों के बिना वह इस मुकाम तक नहीं पहुंच सकती थीं।

सफलता का मूल मंत्र: नियमित टाइम-टेबल और कड़ा परिश्रम

इन मेधावियों की सफलता बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा आपको नहीं रोक सकती। साक्षी ने बताया कि वह नियमित टाइम-टेबल बनाकर पढ़ाई करती थीं, जिससे उन्हें विषयों को समझने में आसानी हुई। प्रदेश की मेरिट सूची में जगह बनाना उनका बचपन का सपना था। रोहड़ू की इन दोनों बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता और शिक्षा ही बदलाव का सबसे बड़ा हथियार है।

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