Himachal News: हिमाचल प्रदेश में नगर निगम और पंचायती राज चुनावों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। मई की तपती गर्मी के बीच राजनीतिक दलों ने इन चुनावों को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। चार नगर निगमों—मंडी, सोलन, पालमपुर और धर्मशाला में 172 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भाजपा ने प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मोर्चा संभाल लिया है।
नगर निगम चुनावों में मंत्रियों और दिग्गजों ने डाला डेरा
प्रदेश के चार प्रमुख शहरों में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। मंडी नगर निगम में अकेले 42 प्रत्याशी मैदान में हैं। कांग्रेस सरकार के लगभग सभी मंत्री और विधायक शहरों में डेरा डाले हुए हैं। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह मंडी में लगातार सक्रिय हैं। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी जल्द ही चुनाव प्रचार के लिए पहुंचेंगे। मंत्रियों को हर वार्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार इन चुनावों के जरिए अपनी लोकप्रियता साबित करना चाहती है।
भाजपा ने उतारा राष्ट्रीय नेतृत्व, जयराम ठाकुर ने संभाली कमान
विपक्षी दल भाजपा ने नगर निगम चुनावों के लिए राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारा है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अपने गृह जिले मंडी में दिन-रात प्रचार कर रहे हैं। वे हर वार्ड में जाकर चुनावी कार्यालय खोल रहे हैं और जनसंपर्क बढ़ा रहे हैं। भाजपा का लक्ष्य कांग्रेस सरकार के गढ़ में सेंध लगाकर अपनी पकड़ मजबूत करना है।
पंचायती राज चुनाव: 50 हजार के पार जा सकता है उम्मीदवारों का आंकड़ा
ग्रामीण संसद यानी पंचायती राज संस्थानों के लिए नामांकन प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रदेश की 3577 पंचायतों में अब तक 42,562 नामांकन पत्र भरे जा चुके हैं। सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन है, जिससे यह आंकड़ा 50 हजार को पार करने की उम्मीद है। हालांकि ये चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं हो रहे हैं, लेकिन अंदरखाने राजनीतिक दलों ने अपने समर्थित उम्मीदवार खड़े किए हैं। जिला परिषद और पंचायत समितियों में कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।
अवैध कब्जे को लेकर कड़ा नियम, बहुओं के चुनाव लड़ने पर संकट
प्रदेश सरकार ने इस बार चुनाव नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। यदि किसी व्यक्ति के ससुर के नाम पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है, तो उसकी बहू चुनाव नहीं लड़ पाएगी। इस सख्त प्रावधान से कई उम्मीदवारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। इसके अलावा, सरकार ने आशा वर्करों को चुनाव लड़ने की विशेष अनुमति प्रदान की है। इन नए नियमों ने ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी गणित को काफी उलझा दिया है।
31 मई तक बना रहेगा चुनावी रोमांच, 17 मई को होगा मतदान
हिमाचल में चुनावी गर्मी अब शहरों से निकलकर ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गई है। नगर निगमों के लिए 17 मई को मतदान होगा, जबकि प्रचार 15 मई की शाम को थम जाएगा। पंचायती राज संस्थाओं के लिए भी सरगर्मी तेज है। चुनावी तापमान 31 मई तक बना रहेगा जब तक पूरी प्रक्रिया संपन्न नहीं हो जाती। हर घर में दस्तक देने के साथ ही नेता मतदाताओं को रिझाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

