India News: भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में आज कीमती धातुओं की कीमतों ने निवेशकों को चौंका दिया है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार में जबरदस्त हलचल देखी गई, जिससे चांदी की चमक काफी बढ़ गई है। घरेलू बाजार में मांग बढ़ने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें अलग दिशा में संकेत दे रही हैं। एमसीएक्स पर चांदी ने 4,444 रुपये की बड़ी बढ़त दर्ज की, जिससे इसकी कीमतें 2,82,755 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर तक पहुंच गईं।
MCX पर चांदी और सोने की कीमतों में भारी उछाल
आज शुरुआती कारोबार के दौरान एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई। हालांकि, दोपहर तक कीमतों में मामूली स्थिरता आई और यह 2,80,774 रुपये के आसपास कारोबार करती दिखी। सोने की कीमतों में भी तेजी का रुख बना रहा, जहां 5 जून की डिलीवरी वाला सोना 580 रुपये महंगा होकर 1,54,243 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। रिटेल बाजार में 24 कैरेट शुद्ध सोना 1,53,980 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,41,150 रुपये के स्तर पर बना हुआ है।
शादियों के सीजन ने घरेलू मांग को दिया सहारा
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजार में इस तेजी का सबसे प्रमुख कारण शादियों का आगामी सीजन है। भारत में शादियों के दौरान ज्वेलरी की भारी मांग रहती है, जिससे कीमतों को निचले स्तर पर मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। मध्यम वर्ग और ज्वेलरी खरीदारों की सक्रियता की वजह से खुदरा बाजार में कीमतों में गिरावट की संभावना कम नजर आ रही है। मांग में स्थिरता रहने से स्थानीय कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर
कीमतों में उछाल का दूसरा बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में आई बाधा है। खाड़ी देशों में संघर्ष की आशंका ने निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर दी है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है। तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। यह अनिश्चितता निवेशकों को जोखिम भरे एसेट्स से दूर कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति
घरेलू बाजार के विपरीत अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में करीब एक फीसदी की गिरावट देखी गई है, जहां यह 4,661 डॉलर प्रति औंस के आसपास रहा। वैश्विक एक्सपर्ट्स का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों और बदलती जियो-पॉलिटिकल स्थितियों के कारण विदेशी निवेशक काफी सावधानी बरत रहे हैं। ग्लोबल मार्केट की इस नरमी का असर जल्द ही स्थानीय कीमतों पर भी दिख सकता है।

