बाजार में मिल रहा नकली दशहरी आम तो नहीं? 5 ट्रिक से करें असली की पहचान, जानें इसके नाम की अनोखी कहानी

Lucknow News: गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आम की मीठी खुशबू फैल जाती है। फलों के राजा में भी दशहरी का नाम सबसे ऊपर आता है। इसकी शहद जैसी मिठास और मक्खन जैसा गूदा इसे बाकी किस्मों से अलग बनाता है। लेकिन क्या आप असली दशहरी पहचान सकते हैं? आइए जानते हैं इसकी पूरी कहानी।

दशहरी का एक टुकड़ा मुंह में जाते ही जो मिठास घुलती है, वह अद्वितीय है। इसमें न ज्यादा रेशे होते हैं, न पानीपन। बस एक पतली गुठली और गाढ़ा, केसरिया गूदा। इसकी खुशबू इतनी तेज होती है कि किचन से पूरे हॉल में फैल जाती है। उत्तर भारत में लोग इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं।

200 साल पुरानी है दशहरी के नाम की कहानी

दशहरी आम की जड़ें उत्तर प्रदेश के लखनऊ के पास एक छोटे से गांव से जुड़ी हैं। कहा जाता है कि करीब 200 साल पहले इसी गांव में इस खास किस्म की पहली बार खेती की गई थी। उस गांव का नाम था दशहरी। वहीं से इस आम को अपनी पहचान मिली। यह नाम आज पूरी दुनिया में मशहूर है। यह आम मालिहाबाद इलाके की पहचान बन चुका है।

दशहरी क्यों है सबसे खास?

दशहरी की सबसे बड़ी ताकत इसका बेजोड़ स्वाद है। इसका गूदा इतना मुलायम होता है कि मुंह में रखते ही घुल जाता है। इसमें रेशे बिल्कुल नहीं होते। यही वजह है कि बच्चे और बुजुर्ग सभी इसे बड़े चाव से खाते हैं। इसकी खुशबू दूर से ही इसकी मौजूदगी का अहसास करा देती है। यह सिर्फ एक फल नहीं, एक अनुभव है।

शरीर को ठंडक और एनर्जी देता है यह फल

दशहरी आम न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद है। यह गर्मी में शरीर को प्राकृतिक ठंडक पहुंचाता है। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी और कई एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। गर्मी में यह आपको तरोताजा रखता है।

5 आसान तरीके: ऐसे पहचानें असली दशहरी आम

बाजार में कई दुकानदार तोतापुरी या अन्य किस्मों को दशहरी बताकर बेच देते हैं। इसलिए आपको सावधान रहने की जरूरत है। पहला, असली दशहरी का आकार लंबा-अंडाकार और थोड़ा टेढ़ा होता है। इसका निचला हिस्सा तोते की चोंच की तरह मुड़ा हुआ निकलता है। अगर आम एकदम गोल है तो समझ जाइए कि वह नकली है।

दूसरी पहचान इसका साइज है। दशहरी का वजन आमतौर पर 200 से 300 ग्राम के बीच होता है। यह न ज्यादा बड़ा होता है, न ज्यादा छोटा। तीसरा, इसका छिलका पतला और हल्के हरे-पीले रंग का होता है। छिलके पर छोटे-छोटे सफेद डॉट्स होते हैं और इसे उंगली से भी छीला जा सकता है।

चौथी और सबसे अहम पहचान है इसका गूदा। असली दशहरी बिल्कुल बिना रेशे का होता है। चाकू चलाने पर यह मक्खन की तरह आसानी से कट जाता है। इसका रंग गहरा केसरिया-पीला होता है। पांचवी पहचान इसकी तेज और मीठी खुशबू है। इसे सूंघते ही आपको पता चल जाएगा कि यह असली है या नहीं।

क्यों पूरी दुनिया में है इसकी भारी डिमांड?

दशहरी आम की डिमांड हर साल बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसका कारण है इसका अनोखा स्वाद और बेहतरीन क्वालिटी। यह आम जल्दी खराब नहीं होता है। इसे आसानी से लंबी दूरी तक ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है। यही वजह है कि यह भारत के अलावा विदेशों में भी खूब पसंद किया जाता है। इसका निर्यात बड़े पैमाने पर होता है।

दशहरी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसे जीआई टैग भी मिला हुआ है। मालिहाबाद का दशहरी आम अपनी विशेष भौगोलिक पहचान के लिए जाना जाता है। वहां की जलवायु और मिट्टी इस फल को एक ऐसा जायका देती है, जो दुनिया में और कहीं नहीं मिलता। यही वजह है कि लोग गर्मी शुरू होते ही इसका इंतजार करने लगते हैं।

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