Gonda News: उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण सरयू नहर परियोजना में पानी की किल्लत और आवंटित बजट के संदिग्ध इस्तेमाल ने शासन का ध्यान खींचा है। देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने इस मामले की गहन पड़ताल शुरू कर दी है। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता से नहर में पानी न आने के कारणों और आवंटित करोड़ों के बजट के खर्च का पूरा विवरण मांगा है। इस जांच के लिए चार मई तक की सख्त समय सीमा तय की गई है।
करोड़ों के बजट खर्च पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल
सरयू नहर खंड चार को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 993 लाख 13 हजार रुपये और 2025-26 में 251 लाख 92 हजार रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया था। कुल मिलाकर लगभग 12.45 करोड़ रुपये विभाग को नहर की सफाई और रखरखाव के लिए मिले थे। आरोप है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद नहरें सूखी पड़ी हैं। आयुक्त ने विशेष रूप से नहर की सफाई और अन्य कार्यों पर हुए वास्तविक खर्च की रिपोर्ट तलब की है।
आरटीआई में विभाग ने दिया था गोलमोल जवाब
दैनिक जागरण ने 10 फरवरी 2026 को जनसूचना अधिकार (RTI) के तहत छह बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। अधिशासी अभियंता ने सूचना देने के बदले 171 पन्नों की फोटोकॉपी के लिए शुल्क जमा करने की शर्त रख दी। अनुबंधों की जानकारी देने में व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला देकर विभाग ने जवाब टालने की कोशिश की। किसानों को पानी मुहैया कराने और टेल तक पानी पहुंचने के सवाल पर भी विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया था।
सूखी नहरों से किसानों की बढ़ी मुसीबतें
सिंचाई विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, खंड चार से संचालित अधिकांश नहरें इस सीजन में सूखी रही हैं। इसका सीधा असर खेती और किसानों पर पड़ा है, जिन्हें सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल सका। विभागीय दावों के उलट, हेड टू टेल तक पानी पहुंचने की बात कागजी साबित हो रही है। आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की सख्ती के बाद अब सिंचाई विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि बजट खर्च का सटीक विवरण देना अब अनिवार्य है।
मीडिया की खबर के बाद प्रशासन हुआ सक्रिय
दैनिक जागरण ने 18 अप्रैल 2026 के अंक में ‘सिंचाई विभाग को आवंटित 12.45 करोड़ कहां खर्च किया पता नहीं’ शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस खुलासे के बाद ही प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। आयुक्त ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि नहरों के संचालन में लापरवाही और सरकारी धन का बंदरबांट कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चार मई की रिपोर्ट के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
भ्रष्टाचार और लापरवाही की होगी सूक्ष्म जांच
सरयू नहर परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र के हजारों किसानों को सिंचाई की सुविधा प्रदान करना था। हालांकि, करोड़ों खर्च होने के बाद भी किसानों का खेत प्यासा रहना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। आयुक्त नागपाल ने नहरों की सफाई के नाम पर हुए फर्जीवाड़े की आशंका को देखते हुए स्थलीय सत्यापन के भी निर्देश दिए हैं। अब देखना यह है कि विभाग बजट खर्च का क्या औचित्य पेश करता है और दोषियों पर क्या एक्शन होता है।


