पेट की गैस और अपच को समझा आम बीमारी, अस्पताल पहुंचे तो पैरों तले खिसक गई जमीन, बची थी सिर्फ 9 महीने की जिंदगी

Health News: यूनाइटेड किंगडम के केंट शहर में रहने वाले लॉरेंस फॉक्स की कहानी हर व्यक्ति के लिए एक बड़ी चेतावनी है। 67 साल के लॉरेंस ने पेट की गैस और अपच को बहुत हल्के में लिया था। वह इसे आम बीमारी समझकर लंबे समय तक घर पर ही सामान्य दवाइयां खाते रहे। लेकिन जब परेशानी बेकाबू हो गई और उन्होंने अस्पताल जाकर मेडिकल जांच कराई, तो डॉक्टरों की बात सुनकर उनके होश उड़ गए। डॉक्टरों ने उन्हें स्टेज फोर पैंक्रियाटिक कैंसर होने की पुष्टि की।

साधारण बीमारी समझकर करते रहे घरेलू इलाज

जुलाई 2024 में लॉरेंस को पेट में अजीब परेशानी शुरू हुई। उनका भोजन पच नहीं रहा था और बार-बार दस्त की शिकायत हो रही थी। उन्होंने इसे पुरानी बीमारी या साधारण अपच समझ लिया। राहत के लिए उन्होंने घर पर इनो और सोडा जैसी दवाएं लेना शुरू कर दिया। इसी बीच उनका वजन तेजी से घटने लगा। कुछ ही समय में उनका वजन छह किलो कम हो गया, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।

सीटी स्कैन की रिपोर्ट ने उड़ा दिए सबके होश

शुरुआत में डॉक्टरों ने हालत को सामान्य इंफेक्शन समझकर एंटीबायोटिक्स दीं। अगस्त में एंडोस्कोपी कराई गई, जिसमें कोई गंभीर बीमारी सामने नहीं आई। इसके बाद नवंबर में सीटी स्कैन कराने पर भयानक सच सामने आया। मेडिकल रिपोर्ट में 75 मिलीमीटर का खतरनाक ट्यूमर दिखा। दिसंबर में डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि यह स्टेज फोर पैंक्रियाटिक कैंसर है। ट्यूमर मुख्य धमनी के बहुत करीब था इसलिए ऑपरेशन करना बिल्कुल संभव नहीं था। डॉक्टरों ने उन्हें केवल नौ महीने का समय दिया।

लक्षणों को अनदेखा करना पड़ा बहुत भारी

डॉक्टरों ने लॉरेंस को बता दिया था कि अब उनके पास जीने के लिए नौ महीने बचे हैं। लॉरेंस पहले कंस्ट्रक्शन मैनेजर के तौर पर काम करते थे। उन्होंने बताया कि मां के निधन के कारण वह भारी मानसिक तनाव में थे। इसी दुख की वजह से वह शरीर के शुरुआती लक्षणों को लगातार अनदेखा करते रहे। पैंक्रियाटिक कैंसर दुनिया के सबसे खतरनाक कैंसर में से एक है। इसके शुरुआती लक्षण अपच और पेट दर्द जैसे होते हैं, जिन्हें लोग आम तौर पर आसानी से पहचान नहीं पाते।

कीमोथेरेपी ने जगाई जीने की एक नई उम्मीद

स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार गंभीर मामलों में पांच साल से ज्यादा जीने की संभावना दस प्रतिशत से कम होती है। डॉक्टरों ने लॉरेंस को कीमोथेरेपी के बारह कठिन राउंड दिए। हर राउंड नौ घंटे तक चलता था। इलाज के बाद ट्यूमर सिकुड़कर सिर्फ पंद्रह मिलीमीटर का रह गया और कैंसर का स्तर काफी कम हो गया। यह बदलाव परिवार के लिए जीवन की नई किरण लाया। अब लॉरेंस गोल्फ और स्विमिंग जैसी शारीरिक गतिविधियां फिर से शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

बेटे ने पिता के इलाज के लिए दौड़ लगाई

पिलग्रिम्स हॉस्पिस संस्था इस समय लॉरेंस का पूरा सपोर्ट कर रही है। लॉरेंस के चालीस वर्षीय बेटे जेमी खुद गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इसके बावजूद उन्होंने पिता के इलाज और कैंसर जागरूकता के लिए ब्राइटन मैराथन में दौड़ लगाई और पैसा जुटाया। लॉरेंस अब सभी को चेतावनी देते हैं कि शरीर के बदलावों को हल्के में ना लें। अगर आपको बार-बार पाचन की समस्या हो या वजन घटे, तो बिना देरी के तुरंत अस्पताल जाकर डॉक्टर से अपनी मेडिकल जांच कराएं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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