ईरान-अमेरिका शांति वार्ता हुई विफल, क्या अब ड्रैगन करेगा तेहरान की मदद? डोनाल्ड ट्रंप ने दी सख्त चेतावनी

International News: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव सुलझाने के कूटनीतिक प्रयास विफल हो गए हैं। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आयोजित शांति वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई है। ईरान ने अमेरिकी युद्धविराम शर्तों को खारिज कर दिया है। इसी बीच पश्चिम एशिया में चीन की भूमिका संदिग्ध हो गई है। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग जल्द ही तेहरान को वायु रक्षा प्रणाली दे सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कदम पर चीन को गंभीर परिणाम भुगतने की कड़ी चेतावनी दी है।

ईरान और अमेरिका ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप

इस्लामाबाद में शांति वार्ता टूटने पर दोनों पक्षों ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी शर्तें पूरी तरह अनुचित हैं। वे इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानते हैं। वहीं, अमेरिकी प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अमेरिका के मुताबिक, उसने तेहरान को सबसे आसान प्रस्ताव दिया था। फिर भी ईरान ने जानबूझकर समझौते से इनकार किया। इस विफलता के कारण पश्चिम एशिया में फिर से युद्ध का खतरा उत्पन्न हो गया है।

चीन की संभावित हथियारों की खेप पर चिंता

शांति वार्ता विफल होने से पश्चिमी देशों की चिंता काफी बढ़ गई है। रॉयटर्स की खुफिया रिपोर्ट ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी एजेंसियों को इस गुप्त सौदे के अहम सुराग मिले हैं। जानकारी के अनुसार, चीन जल्द ही ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम दे सकता है। बीजिंग इन हथियारों को सीधे तेहरान नहीं भेजेगा। वह तीसरे देशों के रास्ते इनकी आपूर्ति करेगा। इसका मुख्य मकसद हथियारों के असली स्रोत को दुनिया से छिपाना है।

डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग को दी सख्त हिदायत

चीन की इस योजना पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त नाराजगी जताई है। रविवार को प्रेस वार्ता में उन्होंने बीजिंग को खुली चेतावनी दी। ट्रंप से चीन द्वारा ईरान को सैन्य मदद देने पर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि चीन को भारी परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप के अनुसार, हथियार देने की स्थिति में चीन को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ेगा। वाशिंगटन इस बाहरी दखल को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने भी जताई आपत्ति

ट्रंप के अलावा अन्य अमेरिकी अधिकारियों ने भी चीन को कड़ा संदेश दिया है। व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ चीन का सैन्य संबंध बढ़ाना अमेरिका को स्वीकार्य नहीं है। ग्रीर ने कहा कि यह दखल द्विपक्षीय संबंधों को उलझा देगा। उन्होंने जोर दिया कि अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने वाले कदम खतरनाक साबित होंगे। इस तनाव को कम करना अब चीन की जिम्मेदारी है।

ईरान को एयर डिफेंस की सख्त जरूरत

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से सैन्य तनातनी जारी है। फरवरी के अंत में हुए संघर्ष में ईरान ने अपना अधिकांश एयर डिफेंस सिस्टम खो दिया था। इस नुकसान के बाद तेहरान अपनी हवाई सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित है। रूस वर्तमान में अपने ही युद्ध में पूरी तरह उलझा हुआ है। इसलिए मॉस्को अभी ईरान को वायु रक्षा प्रणाली देने की स्थिति में नहीं है। ऐसे कठिन समय में चीन ईरान का सबसे बड़ा सहयोगी बना है।

आर्थिक रूप से चीन पर निर्भर है तेहरान

चीन और ईरान के बीच केवल सैन्य ही नहीं, गहरे आर्थिक संबंध भी हैं। अमेरिका ने ईरान पर दशकों से कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था काफी कमजोर हुई है। ऐसे में चीन तेहरान का सबसे बड़ा आर्थिक मददगार साबित हुआ है। ईरान के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा चीन ही खरीदता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के दौरान भी चीनी जहाज बेखौफ चलते रहे। चीन ही ईरान की अधिकांश व्यापारिक जरूरतें पूरी कर रहा है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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