हिमाचल में महिला सुरक्षा की खुली पोल, 1100 मामलों में सिर्फ 35 को सजा, गुड़िया हेल्पलाइन का सच डरा देगा

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों की जमीनी हकीकत बहुत चौंकाने वाली है। सरकार प्रदेश भर में सुरक्षा हेल्पलाइन का जाल बिछाने का लगातार दावा करती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि पीड़िताओं की कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। शिमला के बहुचर्चित कोटखाई छात्रा मामले के बाद गुड़िया हेल्पलाइन की शुरुआत हुई थी। आज यह महत्वपूर्ण हेल्पलाइन अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह भटक गई है। इससे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

गुड़िया हेल्पलाइन को सुरक्षा से हटाकर दूसरी योजनाओं से जोड़ा

महिलाओं की त्वरित सुरक्षा और सहायता के लिए गुड़िया हेल्पलाइन शुरू की गई थी। अब सरकार ने इस हेल्पलाइन को पोषण अभियान और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के साथ जोड़ दिया है। इसका सीधा मतलब है कि इस नंबर पर सुरक्षा से जुड़ी गंभीर शिकायतें सुनने का कोई स्पष्ट तंत्र बाकी नहीं बचा है। यह बदलाव केवल एक साधारण प्रशासनिक फैसला बिल्कुल नहीं है। यह कदम राज्य सरकार की महिला सुरक्षा के प्रति गंभीरता और प्राथमिकताओं की पूरी पोल खोलता है।

तीन साल में दर्ज हुए दुष्कर्म के ग्यारह सौ मामले

राज्य में महिला सुरक्षा की सच्चाई बताने वाले आंकड़े बहुत डराने वाले हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान हिमाचल प्रदेश में करीब ग्यारह सौ दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल पैंतीस मामलों में अपराधियों को सजा मिली है। अदालतों ने करीब एक सौ पैंतीस मामलों को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके अलावा आठ सौ पचास से अधिक मामले आज भी विभिन्न अदालतों में लंबित चल रहे हैं।

धीमी न्याय प्रक्रिया के कारण बेखौफ घूम रहे अपराधी

ये आंकड़े साफ बताते हैं कि राज्य में अपराधी पूरी तरह से बेखौफ हैं। धीमी न्याय प्रक्रिया के कारण अपराधियों के मन से सजा का डर खत्म हो गया है। सजा का खौफ न होने से समाज में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। हिमाचल की शांत छवि के पीछे एक कड़वी सच्चाई छिपी है। यहां पीड़िताएं न्याय पाने के लिए भटकने को मजबूर हैं। सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे ताकि सिस्टम की खामोशी टूटे।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए जारी किए गए प्रमुख हेल्पलाइन नंबर

प्रदेश सरकार को महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हेल्पलाइन को दोबारा सक्रिय करना चाहिए। पुलिस जांच को मजबूत करके अदालतों में लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना बहुत जरूरी है। मुश्किल वक्त में महिलाएं इन आपातकालीन और सरकारी हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग कर सकती हैं:

  • 1515: गुड़िया हेल्पलाइन
  • 1091: महिला हेल्पलाइन (पुलिस)
  • 112: आपातकालीन सेवा
  • 1098: चाइल्ड हेल्पलाइन
  • 1930: साइबर क्राइम हेल्पलाइन
SOURCE: न्यूज एजेंसी
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