International News: नाटो (NATO) के महासचिव मार्क रूट ने संकेत दिया है कि यूरोपीय देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी को गंभीरता से लिया है। अब ये देश अपने सैन्य योगदान को बढ़ाने और अमेरिकी सेना को सैन्य अड्डों के उपयोग की अनुमति देने के लिए सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहे हैं। रूट के अनुसार, महाद्वीप में सैन्य समझौतों को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह बदलाव ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में आए तनाव के बाद देखा जा रहा है।
यूरोप और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग पर जोर
आर्मेनिया में आयोजित यूरोपीय राजनीतिक समुदाय शिखर सम्मेलन में मार्क रूट ने स्वीकार किया कि वाशिंगटन और यूरोप के बीच हाल के दिनों में कुछ निराशा रही है। हालांकि, अब यूरोपीय देश अमेरिका की चिंताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बयान ट्रंप द्वारा ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच नाटो देशों पर लगाए गए अपर्याप्त समर्थन के आरोपों के बाद आया है। अब रणनीतिक दबाव का असर यूरोपीय देशों के रक्षा रुख में स्पष्ट बदलाव के रूप में दिखने लगा है।
जर्मनी का रुख और आंतरिक गठबंधन की चुनौतियां
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने हाल ही में अमेरिका को नाटो का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों का साझा लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। हालांकि, ट्रंप और मर्ज के बीच व्यक्तिगत मतभेद भी उभरे हैं। दूसरी ओर, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने चेतावनी दी है कि गठबंधन के लिए सबसे बड़ा खतरा बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक विभाजन है। उन्होंने 32 सदस्यीय संगठन की एकजुटता पर विशेष जोर दिया है।

