उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण पर बढ़ा ‘सस्पेंस’: ऑनलाइन होगा या ऑफलाइन? यूसीसी के बीच सरकारी आदेशों से उलझन

Uttarakhand News: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक असमंजस पैदा हो गया है। वर्तमान में यूसीसी के प्रावधानों के तहत विवाह पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया केवल ऑनलाइन माध्यम से ही संचालित की जा रही है। हालांकि, वकीलों और आम जनता की ओर से तकनीकी दिक्कतों का हवाला देकर इसे ऑफलाइन करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। इस बीच, वित्त विभाग और गृह विभाग के अलग-अलग रुख ने स्थिति को और अधिक पेचीदा बना दिया है।

वित्त विभाग के नए आदेश से पैदा हुई विरोधाभासी स्थिति

प्रदेश के वित्त विभाग ने 22 मई को एक नया आदेश जारी किया है, जिसने पंजीकरण प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ दी है। उत्तराखंड (रजिस्ट्रीकरण योग्य दस्तावेजों के लिए पक्षकारों की पहचान, बायोमेट्रिक सत्यापन) नियमावली 2023 के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश में दस्तावेजों का पंजीकरण ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है। इस आदेश के प्रस्तर तीन में वसीयत और विवाह पंजीकरण का भी जिक्र है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि ऑफलाइन विकल्प भी खुला है।

गृह विभाग का दोटूक जवाब: अब अस्तित्व में नहीं पुराना नियम

वित्त विभाग के आदेश से उपजे भ्रम पर गृह विभाग ने तत्काल स्थिति स्पष्ट की है। गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य में यूसीसी लागू होने के बाद पुराना विवाह अधिनियम अब प्रभावी नहीं रह गया है। गृह सचिव शैलेश बगौली ने स्पष्ट किया है कि विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप के सभी मामले फिलहाल केवल यूसीसी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ही पंजीकृत किए जाएंगे। गृह विभाग के अनुसार, अभी तक ऑफलाइन प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है।

तकनीकी समस्याओं से जूझ रहे अधिवक्ता और आम नागरिक

यूसीसी के तहत अनिवार्य ऑनलाइन पंजीकरण को लेकर वकीलों में खासा असंतोष देखा जा रहा है। अधिवक्ताओं का तर्क है कि पोर्टल पर आने वाली तकनीकी बाधाओं और इंटरनेट की समस्याओं के कारण पंजीकरण में काफी देरी हो रही है। इसी वजह से वे लंबे समय से ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। वित्त विभाग के हालिया आदेश ने उनकी उम्मीदों को जगा दिया है, लेकिन गृह विभाग की सख्ती ने फिलहाल इस पर पानी फेर दिया है।

जल्द होगी वार्ता, निकलेगा पंजीकरण का बीच का रास्ता

गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि अधिवक्ताओं ने ऑनलाइन प्रक्रिया से संबंधित कुछ गंभीर बिंदु उठाए हैं। सरकार इन तकनीकी समस्याओं को लेकर गंभीर है और जल्द ही संबंधित पक्षों के साथ एक औपचारिक वार्ता की जाएगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना और यूसीसी के नियमों के दायरे में रहते हुए व्यावहारिक समाधान निकालना है। तब तक प्रदेश में विवाह और वसीयत का पंजीकरण यूसीसी के निर्धारित ऑनलाइन फॉर्मेट में ही जारी रहने की संभावना है।

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