Uttar Pradesh News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को विधानसभा के विशेष सत्र के आगाज से पहले विपक्षी दलों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन को स्पष्ट तौर पर ‘महिला विरोधी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन में बाधा उत्पन्न करने वाले दलों के आचरण की निंदा के लिए ही यह विशेष सत्र आहूत किया गया है। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, विपक्ष के डीएनए में ही आधी आबादी का अपमान और शोषण रचा-बसा है।
सपा काल के अत्याचारों का जिक्र: ‘देख सफाई, बिटिया घबराई’ का दिया नारा
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल की याद दिलाते हुए तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब भी प्रदेश में सपा सत्ता में आई, महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। योगी ने ‘देख सफाई, बिटिया घबराई’ जैसे पुराने नारों का जिक्र करते हुए गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाई। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस ने अपनी छवि सुधारने का सुनहरा मौका गवां दिया है। विपक्षी दल अब भी इस कोशिश में जुटे हैं कि महिला आरक्षण से जुड़ा यह संशोधन प्रभावी न हो पाए।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष को बेनकाब करने की तैयारी
सदन की कार्यवाही पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का पूरा दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करने और विपक्ष को बेनकाब करने के लिए समर्पित होगा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में देश की महिलाओं को नीति-निर्धारण में भागीदारी और गरिमा मिल रही है। योगी ने शाहबानो प्रकरण से लेकर अब तक के इतिहास का हवाला देते हुए डीएमके और टीएमसी जैसे दलों को भी घेरा। उनके मुताबिक, भाजपा और एनडीए महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
विपक्ष से मांगा नैतिक जवाब: ‘या तो माफी मांगें या निंदा प्रस्ताव में आएं’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी सदस्यों को चुनौती दी कि यदि उनमें थोड़ा भी नैतिक साहस बचा है, तो वे चर्चा में हिस्सा लें। उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्ष स्पष्ट करे कि उन्होंने नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक का विरोध क्यों किया? योगी ने कहा कि विपक्षी नेताओं का यह दायित्व है कि वे अपने आचरण के लिए सदन और देश से माफी मांगें। मुख्यमंत्री ने विधानमंडल दल के सदस्यों से अपील की कि वे एकजुट होकर उन नेताओं की निंदा करें, जिन्होंने आधी आबादी को उनके अधिकारों से वंचित रखा है।


