SC-ST एक्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! सिर्फ जाति से पुकारना अपराध नहीं, जानिए नियम

Uttar Pradesh News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल किसी व्यक्ति को उसकी जाति के नाम से पुकारना इस कानून के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। इसके लिए आरोपी की मंशा अपमानित करने या डराने की होनी चाहिए। जस्टिस मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने इस अहम मामले की सुनवाई की। अदालत ने अमय पांडे और अन्य आरोपियों के खिलाफ जारी ट्रायल कोर्ट का समन रद्द कर दिया है।

विवाह समारोह के विवाद में गढ़ी गई झूठी कहानी

यह विवाद साल 2019 में एक शादी समारोह के दौरान शुरू हुआ था। अमय पांडे और तीन अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। शिकायतकर्ता ने आरोपियों पर मारपीट और जातिगत टिप्पणी का गंभीर आरोप लगाया था। बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में मजबूती से अपनी दलील पेश की। उन्होंने कहा कि यह मामला दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाने के लिए गढ़ा गया है। शुरुआती शिकायत में किसी जातिगत गाली या अपमान का कोई जिक्र नहीं था।

बयानों में विरोधाभास और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

शिकायतकर्ता ने बाद में दिए बयान में बड़ा बदलाव किया। उसने जातिगत टिप्पणी और हमले का नया आरोप शिकायत में जोड़ दिया। उसने दावा किया कि आरोपियों की पहचान सीसीटीवी फुटेज से हुई है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अभियोजन की कहानी में कई विरोधाभास पाए। अदालत ने देखा कि पहली एफआईआर और बाद के बयानों में बड़ा अंतर है। इस स्पष्ट अंतर ने पूरे मामले की विश्वसनीयता पर सीधे तौर पर सवाल खड़े किए हैं।

मेडिकल रिपोर्ट ने खोली पोल, निजी दुश्मनी का निकला मामला

हाईकोर्ट ने मामले की मेडिकल रिपोर्ट की बारीकी से जांच की। अदालत ने पाया कि मेडिकल रिपोर्ट में पीड़ित को केवल मामूली चोटें लगने की बात है। यह रिपोर्ट अभियोजन पक्ष के गंभीर हमले वाली कहानी से बिल्कुल मेल नहीं खाती है। अदालत ने मामले की पूरी पृष्ठभूमि को एक निजी विवाद से जुड़ा हुआ माना। इस वजह से अदालत का यह शक गहरा हो गया कि इस मामले में कानून का पूरी तरह से गलत इस्तेमाल किया गया है।

जानिए कब लागू होता है एससी-एसटी एक्ट का प्रावधान

हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में एससी-एसटी एक्ट के नियमों की स्थिति साफ कर दी है। अदालत ने कहा कि इस एक्ट के तहत मामला तभी बनता है जब आरोपी ने पीड़ित को जानबूझकर उसकी जाति के आधार पर अपमानित किया हो। यह कृत्य किसी सार्वजनिक स्थान पर या लोगों की मौजूदगी में होना अनिवार्य है। सिर्फ किसी को उसकी जाति से पुकारना, सामान्य गाली-गलौज करना या आपस में झगड़ा करना इस विशेष कानून के दायरे में नहीं आता है।

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