Delhi News: राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। अब दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर ईंधन केवल उन्हीं गाड़ियों को मिलेगा, जिनके पास वैध पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट होगा। परिवहन विभाग ने इस संबंध में नया सर्कुलर जारी कर दिया है। बिना वैध सर्टिफिकेट वाली गाड़ियों को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी देने से साफ मना कर दिया जाएगा। यह नियम अब पूरे साल प्रभावी रहेगा।
लापरवाही पर रद्द हो सकता है इंश्योरेंस क्लेम
प्रदूषण नियमों की अनदेखी अब वाहन मालिकों की जेब पर और भी भारी पड़ने वाली है। अगर आपकी गाड़ी का पीयूसी सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका है, तो दुर्घटना की स्थिति में बीमा कंपनियां आपका क्लेम खारिज कर सकती हैं। कई प्रमुख इंश्योरेंस कंपनियां अब प्रदूषण मानकों का पालन न करने वाले वाहनों के दावों को स्वीकार नहीं कर रही हैं। क्लेम मिलने में होने वाली देरी या रिजेक्शन से बचने के लिए समय पर प्रदूषण जांच अनिवार्य है।
ट्रैफिक पुलिस और ऑटोमेटेड सिस्टम रखेंगे नजर
नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए परिवहन विभाग और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने हाथ मिला लिया है। ‘सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989’ के तहत पीयूसी न होने पर मौके पर ही भारी जुर्माना वसूला जाएगा। अधिकारी न केवल मैन्युअल चेकिंग करेंगे, बल्कि ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए भी एक्सपायर्ड सर्टिफिकेट वाली गाड़ियों पर नजर रखेंगे। इस नई व्यवस्था के तहत जुर्माने की रकम 10,000 रुपये या उससे भी अधिक होने की संभावना जताई जा रही है।
लाइसेंस सस्पेंशन और जेल तक की है नौबत
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 190(2) के तहत पीयूसी नियमों का उल्लंघन एक गंभीर अपराध है। इसके लिए 10,000 रुपये का जुर्माना, 6 महीने की जेल या फिर दोनों सजाएं साथ हो सकती हैं। इतना ही नहीं, परिवहन विभाग के पास नियम तोड़ने वाले चालक का ड्राइविंग लाइसेंस 3 महीने के लिए सस्पेंड करने का भी अधिकार है। यदि सर्टिफिकेट होने के बाद भी गाड़ी ज्यादा धुआं दे रही है, तो सात दिन में नया टेस्ट कराना होगा।
जानिए कैसे और कहाँ बनेगा पीयूसी सर्टिफिकेट
पीयूसी सर्टिफिकेट यह प्रमाणित करता है कि आपकी गाड़ी का उत्सर्जन तय सीमा के भीतर है। दिल्ली-एनसीआर के लगभग सभी पेट्रोल पंपों और अधिकृत वर्कशॉप पर प्रदूषण चेकिंग सेंटर उपलब्ध हैं। चेकिंग के दौरान यदि गाड़ी तय मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो आपको इंजन की ट्यूनिंग या रिपेयरिंग करानी होगी। परिवहन विभाग ने अपनी वेबसाइट पर अधिकृत केंद्रों की पूरी सूची जारी की है। वाहन मालिक वहां जाकर आसानी से अपनी गाड़ी का प्रदूषण स्तर जांच करवा सकते हैं।
प्रदूषण के खिलाफ दिल्ली सरकार की ‘स्थायी’ जंग
दिल्ली में वायु प्रदूषण एक गंभीर संकट बन चुका है और सरकार अब किसी भी ढिलाई के मूड में नहीं है। इस नए आदेश का उद्देश्य सड़कों से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को पूरी तरह बाहर करना है। दिल्ली नगर निगम और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग जैसी एजेंसियां भी इस अभियान में सहयोग कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से शहर की हवा में सुधार होगा। वाहन मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे असुविधा से बचने के लिए अपना सर्टिफिकेट अपडेट रखें।


