Delhi News: दिल्ली में मानसून से पहले जलभराव रोकने की तैयारियां बेहद धीमी गति से चल रही हैं। सरकार ने इस साल जनवरी में ही नालों की सफाई का काम शुरू करवा दिया था। इसका मुख्य उद्देश्य मानसून आने से पहले दिल्ली को जलभराव से बचाना था। लेकिन कई एजेंसियां इस आदेश की खुलेआम अनदेखी कर रही हैं। एमसीडी और लोक निर्माण विभाग का रवैया सबसे ज्यादा निराशाजनक है। तीस मई की तय सीमा तक नालों की सफाई पूरी होना अब मुश्किल लग रहा है।
सफाई कार्यों में एजेंसियों की घोर लापरवाही
दिल्ली में नालों की सफाई की जिम्मेदारी कई अलग-अलग एजेंसियों के पास है। इनमें एमसीडी, लोक निर्माण विभाग और बाढ़ नियंत्रण विभाग मुख्य रूप से शामिल हैं। कुछ विभागों ने समय पर काम शुरू किया है, लेकिन अधिकांश का प्रदर्शन बहुत खराब है। एमसीडी के चार फीट से ज्यादा गहरे नालों की सफाई केवल तेरह प्रतिशत ही हो पाई है। वहीं छोटे नालों का काम सत्तावन प्रतिशत पूरा हुआ है। यह आंकड़े एक बड़े खतरे का सीधा संकेत दे रहे हैं।
बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यों की स्थिति
बाढ़ और नियंत्रण विभाग ने अपने छिहत्तर बड़े नालों की सफाई का दावा किया है। उन्होंने अब तक सत्तावन प्रतिशत काम पूरा करने की बात कही है। विभाग ने कुल अट्ठाईस लाख घन मीटर गाद हटाने का बड़ा लक्ष्य रखा था। अप्रैल महीने तक सोलह लाख घन मीटर से अधिक गाद निकाली जा चुकी है। नजफगढ़ ड्रेन में अड़तालीस प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अन्य एजेंसियां काम का सटीक ब्यौरा देने से लगातार बच रही हैं और जानकारी नहीं दे रही हैं।
आधुनिक मशीनों से सफाई की नई योजना
नालों की सफाई को तेज और प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक मशीनों का सहारा लिया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने चौरानवे करोड़ रुपये की भारी लागत से अड़तीस नई मशीनें खरीदने का फैसला किया है। इनमें से बारह आधुनिक मशीनें विभाग द्वारा खरीदी जा चुकी हैं। शेष अन्य मशीनों को खरीदने की सरकारी प्रक्रिया अभी चल रही है। इन मशीनों से गहरे नालों की गाद आसानी से निकाली जा सकेगी। कर्मचारियों को इससे काम करने में काफी ज्यादा मदद मिलेगी।
सड़कों पर सूख रही गाद, नियम हवा में
नालों से निकाली गई गाद के निपटारे में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। सफाई के स्पष्ट सरकारी निर्देश हैं कि गाद सूखने के तुरंत बाद उसे वहां से हटा दिया जाए। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि बारिश होने पर वह गंदगी दोबारा नालों में न बह जाए। लेकिन मध्य दिल्ली में आईटीओ कब्रिस्तान रोड के पास गाद सड़कों पर ही पड़ी है। पूर्वी दिल्ली के कांति नगर और तैमूर नगर में भी बिल्कुल यही चिंताजनक स्थिति है।
कई प्रमुख इलाकों में कूड़े से पटे नाले
शहर के कई हिस्सों में अब तक नालों की सफाई शुरू ही नहीं हुई है। पूर्वी दिल्ली के ब्रह्मपुरी इलाके में एमसीडी के नाले पूरी तरह कूड़े से पटे हुए हैं। मास्टर प्लान रोड पर शास्त्री नगर के समीप बहने वाले नाले में भारी गंदगी जमा है। अबुल फजल एन्क्लेव के मुख्य नाले पर कूड़े की एक बहुत मोटी परत जम चुकी है। कालकाजी फ्लाईओवर से नेहरू प्लेस मार्ग पर निकाली गई गाद सड़क पर लावारिस हालत में छोड़ी गई है।
बाढ़ नियंत्रण विभाग के आंकड़ों की हकीकत
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के महत्वपूर्ण नालों की स्थिति अभी भी बहुत चिंताजनक बनी हुई है। सप्लीमेंट्री ड्रेन से केवल चौवन प्रतिशत गाद ही निकाली जा सकी है। बारापुला नाले में सफाई का काम जरूर पच्चासी प्रतिशत तक पूरा हो गया है। मुंधेला नाले का लक्ष्य अभी महज छप्पन प्रतिशत तक ही पहुंचा है। ड्रेन नंबर छह से बहत्तर प्रतिशत मलबा साफ किया गया है। पंद्रह लाख टन के विशाल लक्ष्य में से अभी तक केवल आधा काम ही पूरा हुआ है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली और निरीक्षण व्यवस्था
प्रशासन अब जमीनी स्तर पर काम के निष्पादन और जवाबदेही तय करने पर पूरा ध्यान दे रहा है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश मिले हैं कि मानसून से पहले हर जरूरी नाले की पूरी सफाई सुनिश्चित की जाए। नालों से निकाली गई गाद का वैज्ञानिक तरीके से जल्द निस्तारण करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर गाद उड़कर वापस नालों को पूरी तरह जाम कर सकती है। सफाई कार्य की प्रगति जांचने के लिए नियमित रूप से विशेष निरीक्षण किया जा रहा है।
