Bihar News: बिहार की सियासत में एक नए युग का सूत्रपात होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने रविवार से अपनी ‘सद्भाव यात्रा’ का भव्य आगाज कर दिया है। यात्रा के पहले दिन पश्चिमी चंपारण जाते समय हाजीपुर में जदयू कार्यकर्ताओं ने उनका अभूतपूर्व स्वागत किया। फूलों की बारिश और गगनभेदी नारों के बीच निशांत ने सार्वजनिक जीवन में अपनी सक्रिय भूमिका के संकेत दे दिए हैं। इस यात्रा को उनके पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है।
जेसीबी से बरसे फूल और विधायकों ने किया भव्य अभिनंदन
निशांत कुमार की यात्रा जैसे ही हाजीपुर पहुंची, वहां का नजारा देखते ही बन रहा था। वैशाली विधायक सिद्धार्थ पटेल और राजापाकर विधायक महेंद्र राम के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार अभिनंदन किया। स्वागत की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार्यकर्ताओं ने जेसीबी मशीन से उन पर फूलों की वर्षा की। निशांत ने भी अपनी गाड़ी की लिफ्ट से ऊपर निकलकर हाथ हिलाते हुए सभी समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया और कार्यकर्ताओं में जोश भरा।
पिता का आशीर्वाद लेकर गांधी की कर्मभूमि के लिए प्रस्थान
सद्भाव यात्रा पर निकलने से पहले निशांत कुमार ने 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर पिता नीतीश कुमार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे सीधे जदयू के प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां शंखनाद और बिगुल बजाकर उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। निशांत ने अपनी यात्रा के लिए पश्चिमी चंपारण को चुना है, जो महात्मा गांधी की ऐतिहासिक कर्मभूमि रही है। दिलचस्प बात यह है कि नीतीश कुमार ने भी अपनी अधिकांश बड़ी यात्राओं की शुरुआत इसी क्षेत्र से की थी।
मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के साथ चंपारण में शक्ति प्रदर्शन
निशांत की इस यात्रा को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का पूरा समर्थन मिल रहा है। उनके साथ बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार और जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा खुद मौजूद हैं। यात्रा के पहले दिन बेतिया और पश्चिमी चंपारण के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क का कार्यक्रम तय किया गया है। 4 मई को निशांत वाल्मीकिनगर में जंगल सफारी का आनंद भी लेंगे। पूरी यात्रा के दौरान पार्टी अपने कैडर को एकजुट कर एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में है।
‘सद्भाव यात्रा’ के जरिए सबको साथ लेकर चलने का संकल्प
निशांत ने अपनी इस मुहिम को ‘सद्भाव यात्रा’ का नाम दिया है, जिसका मूल मंत्र ‘सबको साथ लेकर चलना’ है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के माध्यम से निशांत अपने पिता के समावेशी विकास और सामाजिक सद्भाव के एजेंडे को जन-जन तक पहुंचाना चाहते हैं। यह यात्रा केवल एक दौरा नहीं, बल्कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में निशांत की पकड़ मजबूत करने और उन्हें पार्टी के नए चेहरे के रूप में स्थापित करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी?
निशांत कुमार अब तक सक्रिय राजनीति और मीडिया की चकाचौंध से दूर ही रहे हैं, लेकिन इस यात्रा ने नई अटकलों को जन्म दे दिया है। जिस तरह से पूरी जदयू मशीनरी इस यात्रा को सफल बनाने में जुटी है, उससे साफ है कि निशांत अब सार्वजनिक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार हैं। चंपारण की धरती से शुरू हुआ यह सफर बिहार की भावी राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अब सभी की निगाहें यात्रा के अगले चरणों और निशांत के भाषणों पर टिकी हैं।


