Delhi News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम पड़ाव के बीच दिल्ली भाजपा में नए अध्यक्ष को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, एनडीएमसी उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा इस दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। हालांकि, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा की ऐतिहासिक जीत को देखते हुए मौजूदा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा की दावेदारी भी काफी मजबूत मानी जा रही है। पार्टी आलाकमान बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद अंतिम फैसला ले सकता है।
सचदेवा के तीन साल और सियासी समीकरण
वीरेंद्र सचदेवा ने दिल्ली भाजपा अध्यक्ष के तौर पर मार्च में अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। भाजपा के संविधान के अनुसार, कोई भी नेता लगातार दो कार्यकाल तक इस पद पर बना रह सकता है। सचदेवा के नेतृत्व में भाजपा ने न केवल 2024 के लोकसभा चुनाव में क्लीन स्वीप किया, बल्कि 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में भी वापसी की। ऐसे में पार्टी का एक बड़ा वर्ग उन्हें दोबारा मौका देने के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है।
जाट बनाम पंजाबी: जातीय गणित में फंसा पेंच
दिल्ली भाजपा के अगले अध्यक्ष के चयन में जातीय समीकरणों की बड़ी भूमिका रहने वाली है। एनडीएमसी उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल जाट समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और नमो ऐप के राष्ट्रीय संयोजक भी हैं। वहीं, हर्ष मल्होत्रा और वीरेंद्र सचदेवा पंजाबी समुदाय से आते हैं। इनके अलावा गुर्जर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले जय प्रकाश के नाम की भी चर्चा चल रही है। राष्ट्रीय नेतृत्व इस बार दिल्ली के सामाजिक ढांचे को ध्यान में रखकर ही नए चेहरे पर मुहर लगाएगा।
हर्ष मल्होत्रा और कुलजीत चहल का बढ़ता कद
केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का बेहद करीबी माना जाता है, जो उनकी दावेदारी को और अधिक विश्वसनीय बनाता है। दूसरी ओर, कुलजीत सिंह चहल का राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ सीधा संपर्क और जमीनी पकड़ उन्हें रेस में आगे रख रही है। भाजपा का एक वरिष्ठ पदाधिकारी इस बात की पुष्टि करता है कि नेतृत्व यह तय करेगा कि आगामी चुनौतियों को देखते हुए किस समुदाय का नेतृत्व दिल्ली में पार्टी को सबसे ज्यादा मजबूती दे पाएगा।
सचदेवा का शानदार रिपोर्ट कार्ड
वीरेंद्र सचदेवा को दिसंबर 2022 में दिल्ली भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। उनके नेतृत्व में पार्टी ने 2025 के विधानसभा चुनावों में 70 में से 48 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया। इससे पहले 2024 के आम चुनाव में भी भाजपा ने दिल्ली की सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज की थी। उनके इस सफल कार्यकाल के बावजूद नए नामों की चर्चा ने दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा दी है। बंगाल चुनाव के परिणाम 4 मई को घोषित होंगे, जिसके बाद घोषणा संभव है।
बंगाल चुनाव के बाद होगा अंतिम फैसला
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया संपन्न होने का इंतजार किया जा रहा है। बुधवार को बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान खत्म होगा। इसके तुरंत बाद दिल्ली भाजपा की कमान किसके हाथ में होगी, इसका औपचारिक एलान हो सकता है। पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव की आहट ने कई दिग्गज नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। दिल्ली की जनता और कार्यकर्ताओं की नजरें अब सीधे केंद्रीय आलाकमान के फैसले पर टिकी हुई हैं।


