India News: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर बढ़ते सड़क हादसों पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने अवैध अतिक्रमण, गैरकानूनी पार्किंग और सुरक्षा ढांचे की कमी पर सख्त रुख अपनाते हुए कई अहम अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि यात्री सुरक्षा अनुच्छेद 21 का हिस्सा है। हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे प्रशासनिक लापरवाही के कारण खतरे का गलियारा नहीं बन सकते।
60 दिन में हटाए जाएंगे हाईवे के किनारे ढाबे और दुकानें
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे में आने वाले सभी अनाधिकृत अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। इसमें ढाबे, भोजनालय और अन्य व्यावसायिक ढांचे शामिल हैं। अदालत ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को 60 दिनों के भीतर यह कार्रवाई पूरी करने को कहा है। कोर्ट ने साफ किया कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते किसी की जान नहीं जानी चाहिए। यह आदेश 13 अप्रैल को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत पारित किया गया।
बिना एनएचएआई की मंजूरी के नहीं मिलेगा लाइसेंस
अदालत ने भविष्य में लाइसेंस जारी करने पर भी रोक लगा दी है। अब बिना एनएचएआई या लोक निर्माण विभाग की मंजूरी के कोई ट्रेड अप्रूवल या एनओसी जारी नहीं की जाएगी। मौजूदा लाइसेंसों की समीक्षा 30 दिनों के भीतर होगी। यह मामला राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में नवंबर 2023 में हुए भीषण हादसों के बाद आया था। इन हादसों में 34 लोगों की मौत हुई थी। कोर्ट ने कहा कि जीवन का अधिकार सुरक्षित वातावरण की जिम्मेदारी राज्य पर डालता है।
हर 75 किलोमीटर पर एंबुलेंस और क्रेन तैनात होंगी
एनएचएआई को 60 दिनों के भीतर हर 75 किलोमीटर पर एंबुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात करने का आदेश दिया गया है। वे-साइड सुविधाओं में यात्रियों के लिए विश्राम, भोजन, शौचालय और सुरक्षित पार्किंग अनिवार्य होगी। साथ ही दिशा-निर्देशक संकेत भी लगाने होंगे। सभी चार और छह लेन वाले हाईवे पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा। यह सिस्टम यातायात की निगरानी करेगा और दुर्घटनाओं को रोकेगा।
45 दिन में जारी होगी ब्लैकस्पॉट की सूची
सुप्रीम कोर्ट ने एनएचएआई और सड़क परिवहन मंत्रालय को 45 दिनों के भीतर दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट की सूची जारी करने का निर्देश दिया है। इन ब्लैकस्पॉट पर लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे और चेतावनी संकेत लगाने होंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार को अंतरराज्यीय समन्वय समिति पर रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते हाईवे मौत का कारण नहीं बनने चाहिए। ये निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
