Uttar Pradesh News: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुश्किलें फिर से बढ़ सकती हैं। उनकी नागरिकता के विवाद को लेकर आज एक अहम सुनवाई होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ इस संवेदनशील मामले पर अपना फैसला सुनाएगी। अदालत यह तय करेगी कि राहुल गांधी को दोहरी नागरिकता मामले में नोटिस जारी किया जाए या नहीं। इस बड़े फैसले पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। यह सुनवाई राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य की अहम दिशा तय कर सकती है।
हाईकोर्ट ने क्यों रोका अपना आदेश?
इस मामले में पिछले कुछ दिनों में कई नाटकीय मोड़ सामने आए हैं। सत्रह अप्रैल को अदालत ने राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। उस समय वकीलों ने बिना नोटिस के कार्रवाई का पूरा समर्थन किया था। हालांकि अठारह अप्रैल को जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने अपने फैसले पर दोबारा विचार किया। उन्होंने कानूनी प्रावधानों का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद कोर्ट ने एफआईआर के आदेश पर रोक लगा दी।
ब्रिटिश नागरिकता से जुड़ा है पूरा विवाद
यह पूरा विवाद राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर ने अदालत में कई गंभीर और बड़े दावे किए हैं। उनका कहना है कि राहुल गांधी ब्रिटेन के नागरिक और वहां के मतदाता रहे हैं। अदालत ने इस मामले की जांच के लिए गृह मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने फॉरेनर्स डिवीजन से मिली टॉप सीक्रेट फाइलों का भी पूरा अध्ययन किया है।
सीबीआई जांच की संभावना और सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने पहले ही इस मामले को बेहद गंभीर और संवेदनशील बताया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि राज्य सरकार सीबीआई जांच की सिफारिश कर सकती है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साल दो हजार उन्नीस में ऐसी ही एक याचिका खारिज की थी। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इस मामले में अहम टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि किसी फॉर्म में नाम लिखने से कोई विदेशी नागरिक नहीं बन जाता।
राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य पर संकट
उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी पर कई अन्य गंभीर मामले भी चल रहे हैं। मोदी सरनेम मामले में उनकी सांसदी भी चली गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के दखल से उन्हें बड़ी राहत मिली थी। अब अगर आज हाईकोर्ट नोटिस जारी करता है तो मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी। इस मामले की जांच कांग्रेस पार्टी के लिए एक नई चुनौती बनेगी। सियासी गलियारों में इस संभावित फैसले को लेकर खासी हलचल मची है।
