West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बहुत बड़ा सियासी घमासान मच गया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अहम याचिका दायर की है। टीएमसी को अपने करीब आठ सौ कार्यकर्ताओं की अचानक गिरफ्तारी का भारी डर सता रहा है। पार्टी नेता कल्याण बनर्जी ने अदालत से तुरंत दखल देने की जोरदार मांग की है। हाईकोर्ट ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के लिए बाईस अप्रैल की तारीख तय कर दी है।
चुनाव आयोग के निर्देश और टीएमसी की बड़ी चिंता
तृणमूल कांग्रेस को चुनाव आयोग के सख्त रवैये से बड़ी घबराहट हो रही है। पार्टी का स्पष्ट दावा है कि चुनाव आयोग टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। आयोग के कड़े निर्देशों के बाद मतदान से पहले इन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हो सकती है। टीएमसी ने अदालत को बताया है कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। इसलिए पार्टी ने समय रहते कलकत्ता हाईकोर्ट की शरण लेना ही उचित समझा है।
ममता बनर्जी की रैलियों में गूंजा गिरफ्तारी का डर
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पिछले कई दिनों से अपनी हर चुनावी रैली में यह अहम मुद्दा उठा रही हैं। उन्होंने पहले ही आशंका जताई थी कि मतदान से ठीक पहले उनके पार्टी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जाएगा। इसमें खासकर पोलिंग एजेंट और मतगणना एजेंट शामिल हैं। ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं को कड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि अचानक गिरफ्तारी होने की स्थिति में हमेशा एक मजबूत बैकअप प्लान तैयार रखा जाना चाहिए।
हाईकोर्ट की बेंच करेगी चुनाव से पहले अहम सुनवाई
कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने टीएमसी की याचिका स्वीकार कर ली है। इस अहम बेंच में न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन भी प्रमुख रूप से शामिल हैं। अदालत इस पूरे मामले पर बाईस अप्रैल को अपनी पहली सुनवाई करेगी। यह तारीख इसलिए बहुत अहम है क्योंकि तेईस अप्रैल को ही पहले चरण का भारी मतदान होना है। ऐसे में चुनाव से ठीक एक दिन पहले होने वाली यह अदालती सुनवाई काफी महत्वपूर्ण साबित होगी।
बंगाल चुनाव में सुरक्षा बलों की हुई भारी तैनाती
पश्चिम बंगाल में इस बार विधानसभा चुनाव बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराए जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने केवल पहले चरण के मतदान के लिए ही केंद्रीय बलों की 2407 कंपनियां तैनात की हैं। इनमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और इंडिया रिजर्व बटालियन के कई जवान शामिल हैं। अन्य राज्यों की सशस्त्र पुलिस इकाइयों को भी ड्यूटी पर लगाया गया है। यह पूरी केंद्रीय फोर्स पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस के जवानों के बिल्कुल अतिरिक्त काम करेगी।
टीएमसी की कानूनी लड़ाई और आगे की बड़ी रणनीति
तृणमूल कांग्रेस अब चुनाव आयोग के हर सख्त कदम का कानूनी तरीके से कड़ा जवाब दे रही है। पार्टी का मानना है कि अदालत का दरवाजा खटखटाने से उनकी बड़ी आशंकाओं को मजबूत आधिकारिक रूप मिल गया है। वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी इस मामले में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। बंगाल का यह चुनाव अब केवल मैदान में नहीं बल्कि अदालतों में भी लड़ा जा रहा है। अब सभी की निगाहें बाईस अप्रैल की अहम सुनवाई पर टिकी हैं।
