Gujarat News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को एक बार फिर सोमनाथ मंदिर की यात्रा करेंगे। पीएम मोदी ने एक विशेष लेख के जरिए इस ऐतिहासिक दौरे की जानकारी साझा की है। यह अवसर भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा मंदिर के उद्घाटन के 75 साल पूरे होने का प्रतीक है। पीएम मोदी ने कहा कि छह महीने के भीतर सोमनाथ के दो महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है। यह यात्रा ‘विनाश से पुनर्निर्माण’ के संकल्प को दर्शाती है।
सोमनाथ का सभ्यतागत संदेश और कालजयी इतिहास
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में सोमनाथ को एक सभ्यतागत संदेश देने वाला स्थान बताया है। उनके अनुसार, सोमनाथ के सामने फैला समुद्र हमें कालजयी होने का एहसास कराता है। यह मंदिर विध्वंस से सृजन तक के सफर की जीती-जागती कहानी कहता है। शास्त्रों का हवाला देते हुए पीएम ने बताया कि सोमनाथ की एक प्रदक्षिणा पूरी धरती की प्रदक्षिणा के समान है। सदियों से कई साम्राज्य बने और गिरे, लेकिन सोमनाथ की लौ कभी बुझ नहीं सकी। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का केंद्र है।
इतिहास के नायकों और अहिल्याबाई होल्कर का स्मरण
पीएम मोदी ने उन महान विभूतियों को याद किया जिन्होंने हमलों के बावजूद सभ्यता के सम्मान की रक्षा की। उन्होंने महाराजा धरसेन, भीम देव, राजा भोज और सिद्धराज जयसिम्हा के योगदान का जिक्र किया। विशेष रूप से पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्मशताब्दी पर उन्हें नमन किया। अहिल्याबाई ने सबसे कठिन समय में भी मंदिर में भक्ति की निरंतरता सुनिश्चित की थी। इसके साथ ही वीर हमीरजी गोहिल और वीर वेगडाजी भील के बलिदान को भी सोमनाथ की जीवंत स्मृति का हिस्सा बताया।
सरदार पटेल का सपना और नेहरू का विरोध
आजादी के समय सरदार पटेल सोमनाथ की जर्जर हालत देखकर बहुत व्यथित थे। 13 नवंबर 1947 को उन्होंने मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र संकल्प लिया था। दुर्भाग्य से, मंदिर पूरा होने से पहले ही सरदार पटेल का निधन हो गया। उनके अधूरे कार्य को के.एम. मुंशी ने आगे बढ़ाया। 1951 में जब मंदिर तैयार हुआ, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कड़े विरोध के बावजूद राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। यह पल भारतीय इतिहास में अत्यंत गौरवशाली माना जाता है।
अटल-आडवाणी के साथ बिताए पल और डॉ. प्रसाद का संदेश
प्रधानमंत्री ने अक्टूबर 2001 की यादें भी ताजा कीं जब उन्होंने मुख्यमंत्री का पद संभाला था। तब मंदिर के 50 वर्ष पूरे होने पर अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सोमनाथ आए थे। पीएम ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के 1951 के भाषण को उद्धृत किया। डॉ. प्रसाद ने कहा था कि अटूट आस्था और प्रेम से जुड़ी चीज को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता। मंदिर का जीर्णोद्धार केवल ईंट-पत्थर का काम नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में समृद्धि लाने की अटूट भावना का प्रतीक है।


