Bihar News: नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के छात्रों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पटना के प्रसिद्ध शिक्षक खान सर ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि पेपर रद्द होना लाखों छात्रों के आत्मविश्वास पर सीधा प्रहार है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने इसे ‘नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी’ करार दिया। खान सर के मुताबिक, बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं युवाओं के भविष्य और उनके मनोबल को पूरी तरह तोड़ रही हैं।
NTA की कार्यप्रणाली और एजेंसी की विफलता पर गंभीर सवाल
खान सर ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि पेपर लीक की जानकारी सरकारी एजेंसियों के बजाय छात्रों ने सरकार तक पहुंचाई। उनके अनुसार, 2024 में भी इसी तरह की धांधली सामने आई थी, लेकिन जांच का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। दोषियों को सजा न मिलने के कारण उनके हौसले बुलंद हैं। उन्होंने वर्तमान जांच प्रक्रिया पर तंज कसते हुए कहा कि जब तक सीबीआइ किसी नतीजे पर पहुंचेगी, तब तक पीड़ित छात्रों की एमबीबीएस की पढ़ाई भी पूरी हो जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच कराने की बड़ी मांग
व्यवस्था में सुधार के लिए खान सर ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को इस पूरे मामले का ऑबजर्वर नियुक्त करना चाहिए। एक निश्चित समय सीमा के भीतर जांच पूरी कर दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। खान सर ने प्रधानमंत्री से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका मानना है कि जब तक शीर्ष स्तर से कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी धांधली पर लगाम लगाना नामुमकिन है।
अलख पांडे ने सिस्टम और अमीरों के खेल पर साधा निशाना
फिजिक्स वाला के सीईओ अलख पांडे ने भी परीक्षा रद्द होने पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि लगभग 23 लाख छात्रों और उनके परिवारों के सपने इस घटना से चकनाचूर हो गए हैं। पांडे ने आरोप लगाया कि गरीब छात्र मेहनत करता है, जबकि अमीर बच्चे पैसे के दम पर पेपर हासिल कर लेते हैं। इससे ईमानदार छात्रों का पूरे सिस्टम से भरोसा उठ जाता है। उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के उस दावे पर भी सवाल उठाए जिसमें फुल-प्रूफ सुरक्षा का वादा किया गया था।
22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में, देशव्यापी बहस शुरू
3 मई को आयोजित हुई नीट यूजी परीक्षा में करीब 22 लाख छात्र शामिल हुए थे। पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद एनटीए ने इसे रद्द करने का फैसला लिया। इस निर्णय ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लगा दिया है। देशभर में अब पेपर लीक और परीक्षाओं की शुचिता को लेकर नई बहस छिड़ गई है। छात्र अब सड़कों पर उतरकर अपने भविष्य की सुरक्षा और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं।

