“सनातन बरगद के पेड़ जैसा है”, उदयनिधि स्टालिन के प्रहार पर RSS नेता दत्तात्रेय होसबले का बड़ा पलटवार

New Delhi News: सनातन धर्म के मुद्दे पर राजनीतिक घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन के विवादास्पद बयानों का करारा जवाब दिया है। होसबले ने सनातन धर्म की तुलना एक विशाल बरगद के पेड़ से करते हुए इसे ‘अमिट’ बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानों के जरिए इस प्राचीन सभ्यता को कभी खत्म नहीं किया जा सकता क्योंकि यह राष्ट्र की आत्मा है।

दत्तात्रेय होसबले ने पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि सनातन शाश्वत है। उन्होंने तर्क दिया कि प्रकाश या परछाई को नापसंद करने से वे दुनिया से गायब नहीं हो जाते। संघ नेता के अनुसार, सनातन कोई साधारण धार्मिक प्रथा मात्र नहीं है। यह जीवन जीने का एक विशेष नजरिया और गहरे मानवीय मूल्यों का संगम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनावी नतीजों के जरिए देश की जनता पहले ही ऐसे बयानों का जवाब दे चुकी है।

“सनातन सदा प्राचीन और सदा नूतन है”

आरएसएस नेता ने सनातन की व्याख्या करते हुए उसे बरगद के वृक्ष जैसा बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह सैकड़ों सालों के बाद भी बरगद अडिग खड़ा रहता है, सनातन भी वैसा ही है। इसकी जड़ें और तना भले ही पुराने हों, लेकिन इसमें हर मौसम में नए पत्ते और फूल खिलते हैं। होसबले के अनुसार, यह ‘नित्य नूतन और चिर प्राचीन’ का अद्भुत मिश्रण है। हमारी सभ्यता की यादें हजारों साल पुरानी होने के बावजूद हम आधुनिकता का स्वागत करते हैं।

दत्तात्रेय होसबले ने स्पष्ट किया कि भारतीय सभ्यता पुरानी यादों को संजोने के साथ-साथ भविष्य की तकनीक के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा कि हम एआई (AI) और अन्य वैज्ञानिक प्रगति का जश्न मनाते हैं। उदयनिधि स्टालिन पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि शायद वे भी अनजाने में सनातन धर्म का ही पालन कर रहे हैं। संघ नेता ने कहा कि कुछ लोग गलतफहमी में सनातन को केवल जातिगत ऊंच-नीच से जोड़कर देख रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।

उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में दोहराया अपना रुख

दूसरी ओर, तमिलनाडु के पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन अपने पुराने रुख पर कायम हैं। मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में उन्होंने एक बार फिर सनातन धर्म के उन्मूलन की बात दोहराई। उदयनिधि ने सदन में कहा कि जो विचारधारा लोगों को आपस में बांटती है, उसे निश्चित रूप से खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने विपक्ष के नेता के तौर पर अपने संबोधन में ‘तमिल थाई वझथु’ गीत को हाशिए पर धकेलने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध किया।

स्टालिन ने सरकारी कार्यक्रमों में तमिल संस्कृति और भाषा की प्राथमिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में आयोजित किसी भी समारोह में तमिल गीतों को पहला स्थान मिलना चाहिए। उदयनिधि ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई उस व्यवस्था के खिलाफ है जो भेदभाव पैदा करती है। विधानसभा में हुई इस बहस ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में सनातन और क्षेत्रीय अस्मिता के मुद्दों पर राजनीति और भी गरमाने वाली है।

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