Kolkata News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली करारी हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बड़ा राजनीतिक दांव चल सकती हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ‘दीदी’ अब राज्य की राजनीति छोड़ दिल्ली का रुख कर सकती हैं। वह बहरामपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर संसद पहुंच सकती हैं। इसके लिए वर्तमान सांसद युसूफ पठान को अपनी सीट छोड़नी पड़ सकती है। यह कदम टीएमसी की भविष्य की राजनीति को पूरी तरह बदल देगा।
विधानसभा चुनावों के नतीजों ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को सोचने पर मजबूर कर दिया है। ममता बनर्जी अब खुद को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना चाहती हैं। बहरामपुर सीट टीएमसी के लिए एक सुरक्षित ठिकाना मानी जाती है। युसूफ पठान ने यहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया था। अब चर्चा है कि ममता इसी सीट से उपचुनाव लड़कर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रही हैं।
युसूफ पठान का राजनीतिक भविष्य और ममता का त्याग
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल पूर्व क्रिकेटर युसूफ पठान के करियर को लेकर है। युसूफ पठान ने खेल के बाद राजनीति में बहुत ही सफल शुरुआत की थी। अगर ममता बनर्जी बहरामपुर से चुनाव लड़ती हैं, तो युसूफ को इस्तीफा देना होगा। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर मंथन जारी है कि युसूफ को इसके बदले क्या जिम्मेदारी दी जाएगी। क्या वह अपनी सीट का बलिदान देकर ममता बनर्जी के लिए रास्ता साफ करेंगे?
विपक्षी दल भाजपा और कांग्रेस ममता बनर्जी के इस संभावित कदम पर पैनी नजर रखे हुए हैं। बंगाल में सत्ता खिसकने के बाद ममता का दिल्ली जाना उनकी मजबूरी भी माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि ममता अब ‘इंडिया गठबंधन’ के चेहरे के रूप में खुद को पेश करना चाहती हैं। इसके लिए संसद का सदस्य होना उनके लिए बेहद जरूरी है। बहरामपुर की जनता भी इस नए राजनीतिक समीकरण को लेकर काफी उत्सुक नजर आ रही है।
बहरामपुर सीट का सियासी समीकरण और दीदी की रणनीति
बहरामपुर लोकसभा सीट का जातीय और धार्मिक समीकरण टीएमसी के पक्ष में मजबूती से खड़ा है। इसी वजह से ममता बनर्जी ने इस सुरक्षित सीट को अपने दिल्ली मिशन के लिए चुना है। अगर युसूफ पठान इस्तीफा देते हैं, तो वहां छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना होगा। ममता बनर्जी अपनी साख बचाने के लिए इस चुनाव को बड़ी जीत में बदलना चाहेंगी। पार्टी कार्यकर्ताओं को अभी से इस बड़े बदलाव के लिए संकेत दिए जाने लगे हैं।

