India News: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत 21वीं सदी का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लेने जा रहा है, जो देश की नारी शक्ति को समर्पित है। संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है। इसका उद्देश्य लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। अब इसके क्रियान्वयन पर चर्चा के लिए तीन दिवसीय सत्र बुलाया गया है।
संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण पर होगी अहम बहस
प्रधानमंत्री मोदी ने 13 अप्रैल को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्तर के ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार अधिनियम को लागू करने के लिए संवाद, सहयोग और सहभागिता से काम करेगी। इस बार भी सभी दलों का सहयोग मिलेगा। महिलाओं के लिए विधानसभा और लोकसभा में अधिक प्रतिनिधित्व का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। प्रधानमंत्री ने देश की सभी महिलाओं को नए युग की बधाई दी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है?
संसद ने सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था। यह विधायी निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। अब इसके कार्यान्वयन को ध्यान में रखते हुए 16 अप्रैल से संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र आहूत किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- नारी शक्ति ने छुई नई ऊंचाइयां
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान में राष्ट्रपति से लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री तक महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पंचायती राज संस्थाएं महिला नेतृत्व का प्रभावी उदाहरण हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को और अधिक अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि सशक्त भारत के निर्माण में बेटियों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। सरकार महिला सुरक्षा के प्रति भी विशेष रूप से संवेदनशील है। प्रधानमंत्री ने महिलाओं से अधिनियम की चर्चा गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया।
मध्यप्रदेश में नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा 25 अप्रैल तक
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय भोपाल से कार्यक्रम में वर्चुअल सहभागिता की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप प्रदेश में व्यापक गतिविधियां चल रही हैं। राज्य सरकार 10 से 25 अप्रैल तक नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा मना रही है। पूरे प्रदेश में सम्मेलन और नारी शक्ति पदयात्रा निकाली जाएगी। सभी महाविद्यालयों में इस दौरान विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों और संस्थाओं को लिखा पत्र
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिनियम की जानकारी के प्रसार के लिए सभी दलों, संगठनों और समाज के वर्गों से सहयोग का आह्वान किया है। उन्होंने सांसदों, विधायकों, नगरीय निकाय और पंचायत राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को पत्र लिखा है। सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को भी पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम लोकतंत्र को अधिक समावेशी और सशक्त बनाएगा।
मध्यप्रदेश को महिला सशक्तिकरण में मॉडल राज्य बताया
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने पत्र में लिखा कि मध्यप्रदेश हमेशा से महिला सशक्तिकरण में देश के लिए मॉडल राज्य रहा है। लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजना ने करोड़ों महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। प्रदेश ने पुलिस और शिक्षक भर्तियों में बेटियों को विशेष अवसर दिए हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमान भी महिलाओं को सौंपी गई है।
दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन का आह्वान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिखा है कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण लागू होने के बाद हों, यह उचित होगा। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस ऐतिहासिक बदलाव का समर्थन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शासन में महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी से जन-विश्वास और अधिक गहरा होगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से नारी शक्ति के गौरव को बढ़ाने में सहयोग देने की अपील की।
