नौकरी के बदले जमीन घोटाला: लालू यादव की FIR रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

Bihar News: चर्चित ‘नौकरी के बदले जमीन घोटाले’ मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सोमवार (13 अप्रैल) को लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, बेंच ने उन्हें कुछ राहत देते हुए ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है।

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने लालू यादव की अपील को खारिज कर दिया। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 24 मार्च को इस मामले में सीबीआई की एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने लालू यादव की इस दलील को नहीं माना था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पहले मंजूरी न होने के कारण सीबीआई की कार्रवाई अवैध है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत पेशी से छूट, लेकिन FIR खारिज नहीं

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को राहत देते हुए कहा कि उन्हें ट्रायल के दौरान कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन इस राहत के बावजूद, अदालत ने एफआईआर को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि सीबीआई की जांच और निचली अदालत में चल रही कार्यवाही जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से लालू यादव पर कानूनी दबाव और बढ़ गया है।

क्या है जमीन के बदले नौकरी का मामला?

यह मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है। उस समय लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप डी की कई नियुक्तियां कीं। ये नियुक्तियां जमीन के बदले में की गई थीं। नौकरी पाने वालों ने लालू यादव, उनके परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीनें तोहफे में दीं या ट्रांसफर कीं।

सीबीआई ने लगाए गंभीर आरोप, पहले तय हुए आरोप

सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इससे पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू स्पेशल कोर्ट ने जनवरी 2026 में इस मामले में 41 आरोपियों पर आरोप तय किए थे। लालू यादव ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत सीबीआई को पहले से मंजूरी लेनी चाहिए थी। कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी। अब निचली अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी।

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