Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की प्रतिष्ठित ‘चेस्टर हिल’ आवासीय कालोनी पर सरकारी कब्जे की तलवार लटक रही है। धारा-118 के कथित उल्लंघन के आरोपों ने यहां करोड़ों रुपये निवेश कर चुके सैकड़ों परिवारों की नींद उड़ा दी है। प्रशासनिक कार्रवाई की आहट से फ्लैट खरीदारों में भारी असमंजस और डर का माहौल है। बेदखली की आशंका के कारण अब लोग इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर बोलने से भी कतरा रहे हैं।
धारा-118 के उल्लंघन और जेडीए पर उठे गंभीर सवाल
चेस्टर हिल परियोजना में भूमि स्वामित्व और निर्माण अनुमति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा-118 के उल्लंघन के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। आरोप है कि बाहरी राज्यों के निवेशकों ने स्थानीय कृषकों का मोहरा बनाकर इस टाउनशिप को विकसित किया। ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (जेडीए) के माध्यम से नियमों को दरकिनार कर करोड़ों का निवेश किया गया।
बेदखली के डर से परेशान हैं सैकड़ों फ्लैट खरीदार
जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर घर खरीदने वाले लोग अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कई परिवारों ने भारी भरकम बैंक लोन लेकर इन फ्लैट्स का भुगतान किया है। यदि सरकार बिल्डिंग को अपने कब्जे में लेती है, तो खरीदारों को न केवल घर खोना पड़ेगा बल्कि आर्थिक तबाही भी झेलनी होगी। घर छिन जाने के बावजूद बैंक की ईएमआई चुकाने का संकट उनके सामने पहाड़ जैसा खड़ा है।
बिल्डर और सरकारी विभागों की भूमिका की होगी जांच
फ्लैट बेचते समय बिल्डर ने सभी दस्तावेजों को पूरी तरह वैध बताया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर सरकारी नियमों की अनदेखी हुई, तो इसकी सजा आम जनता को क्यों दी जा रही है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और राजस्व विभाग की मंजूरी के बिना इतना बड़ा प्रोजेक्ट कैसे खड़ा हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे प्रकरण में बिल्डर के साथ संबंधित विभागों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
600 फ्लैट्स का निर्माण और 200 परिवारों का आशियाना
चेस्टर हिल कालोनी में वर्तमान में चार बड़े टावर फेज-वन से फेज-फोर तक मौजूद हैं। यहां कुल 600 फ्लैट बन चुके हैं, जिनमें से 200 में परिवार निवास कर रहे हैं। बाकी फ्लैट फिलहाल खाली पड़े हैं। कॉलोनी में अभी भी निर्माण कार्य जारी है। अगर प्रशासन सख्त कार्रवाई करता है, तो यहां रह रहे सैकड़ों लोगों का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा। कोर्ट की अगली सुनवाई अब भविष्य की दिशा तय करेगी।
जिला दंडाधिकारी की अदालत में 23 अप्रैल को सुनवाई
सोलन के उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगाई गई है। हालांकि, शिकायत के आधार पर गहन जांच जारी है। मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 23 अप्रैल को जिला दंडाधिकारी की अदालत में निर्धारित है। अदालत सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लेगी। प्रशासन का कहना है कि नियमों के उल्लंघन पर कानून अपना काम सख्ती से करेगा।
