Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आने वाले दिनों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। सीटू से जुड़ी सैहब सोसाइटी यूनियन ने 15 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का बड़ा फैसला लिया है। नगर निगम द्वारा वार्षिक वेतन वृद्धि बंद करने के विरोध में कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। इस हड़ताल के कारण डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने और सड़कों की सफाई जैसे जरूरी काम पूरी तरह ठप रहेंगे।
मंगलवार को शिमला में आयोजित सैहब कर्मियों की बैठक में यह कड़ा निर्णय लिया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन ने उनकी 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी है। इसकी जगह केवल 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने का फैसला हुआ है। इससे हर कर्मचारी को हर महीने 1000 रुपये तक का सीधा नुकसान होगा। यूनियन ने साफ किया है कि जब तक वेतन वृद्धि बहाल नहीं होती, काम बंद रहेगा।
काम का बढ़ता बोझ और प्रशासन की तानाशाही
यूनियन नेताओं ने नगर निगम के फैसले को पूरी तरह मजदूर विरोधी और तानाशाही करार दिया है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कर्मचारियों पर काम का बोझ कई गुना बढ़ गया है। पहले एक सफाई कर्मचारी के पास करीब 80 घर होते थे। अब प्रशासन ने यह संख्या बढ़ाकर 300 तक कर दी है। इसके बावजूद वेतन बढ़ाने के बजाय पुरानी सुविधाओं को भी छीना जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है।
बैठक में नगर निगम पर फिजूलखर्ची के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नेताओं ने कहा कि क्यूआर कोड व्यवस्था पर ढाई करोड़ रुपये बर्बाद किए गए। इसी राशि से नए कर्मचारियों की भर्ती की जा सकती थी। कर्मचारियों को बोनस एक्ट के तहत मिलने वाला पूरा पैसा भी नहीं मिल रहा है। इसके अलावा ओवरटाइम और कानूनी छुट्टियों का भुगतान न करना श्रम कानूनों का सरेआम उल्लंघन है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हड़ताल से शहर की व्यवस्था बिगड़ने का खतरा
सफाई कर्मचारियों की इस हड़ताल से पर्यटन सीजन के दौरान शिमला की खूबसूरती पर दाग लग सकता है। मजदूरों की 15 दिन की विशेष छुट्टियां भी समाप्त कर दी गई हैं। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ तो यह आंदोलन लंबा खिंच सकता है। ऐसे में पूरे शहर में कूड़े के ढेर लगने और गंदगी फैलने की आशंका बढ़ गई है, जिसका सीधा असर आम जनता और पर्यटकों पर पड़ेगा।

