Himachal News: हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने प्रदेश के प्रॉपर्टी बाजार में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त रुख अपना लिया है। अथॉरिटी ने वित्तीय अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी करने पर चेस्टर हिल-2 और चेस्टर हिल-4 आवासीय परियोजनाओं के प्रमोटरों पर 70 लाख रुपए का भारी जुर्माना ठोंका है। रेरा ने दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए अलग-अलग आदेश जारी करते हुए 35-35 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है। यह कार्रवाई रेरा अधिनियम 2016 की धारा 60 के तहत की गई है। जांच में पाया गया कि प्रमोटरों ने खरीदारों से प्राप्त राशि और प्रोजेक्ट पर हुए खर्च का पारदर्शी रिकॉर्ड नहीं रखा था।
वित्तीय कुप्रबंधन और खातों में मिली गंभीर खामियां
रेरा की जांच में खुलासा हुआ कि प्रमोटरों ने न केवल वित्तीय प्रबंधन में लापरवाही बरती, बल्कि खातों के रखरखाव में भी गंभीर अनियमितताएं कीं। नियमों के अनुसार, प्रमोटर को प्रोजेक्ट के लिए प्राप्त राशि का एक निश्चित हिस्सा अलग खाते में रखना अनिवार्य होता है। हालांकि, चेस्टर हिल के मामले में वित्तीय पारदर्शिता का अभाव पाया गया। अथॉरिटी ने इसे घर खरीदारों के हितों के साथ खिलवाड़ माना है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में जवाबदेही तय करना और निवेशकों के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सुओ-मोटो जांच जारी, बढ़ सकती हैं प्रमोटरों की मुश्किलें
रेरा के अध्यक्ष आरडी धीमान ने स्पष्ट किया कि 70 लाख रुपए का यह दंड अभी केवल अंतरिम है। अथॉरिटी इस मामले में सुओ-मोटो (स्वतः संज्ञान) जांच कर रही है, जिसके तहत अन्य तकनीकी उल्लंघनों की भी पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद प्रमोटरों पर और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। धीमान ने संकेत दिए हैं कि यदि अन्य धाराओं के तहत आरोप सिद्ध होते हैं, तो भारी आर्थिक दंड के साथ-साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे। रेरा वर्तमान में प्रमोटरों द्वारा दी गई दलीलों और दस्तावेजों की गहन समीक्षा कर रहा है।
नक्शों से छेड़छाड़ और अवैध कब्जों पर भी नजर
अथॉरिटी केवल वित्तीय पहलुओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता और वैधता की भी जांच कर रही है। प्रमोटरों पर धारा 11 के तहत जिम्मेदारियों का पालन न करने और धारा 14 के तहत स्वीकृत नक्शों व डिजाइन से हटकर निर्माण करने का संदेह है। सबसे गंभीर आरोप धारा 17 का उल्लंघन है, जिसमें कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) लिए बिना ही खरीदारों को फ्लैट का कब्जा सौंप दिया गया। रेरा ने इन सभी बिंदुओं पर संबंधित सरकारी विभागों और तकनीकी एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
रियल एस्टेट प्रमोटरों के लिए सख्त चेतावनी
रेरा अध्यक्ष ने कहा कि इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी। यह कार्रवाई उन सभी प्रमोटरों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है जो नियमों को ताक पर रखकर प्रोजेक्ट चला रहे हैं। अथॉरिटी का मानना है कि इस तरह के सख्त कदमों से घर खरीदारों का भरोसा मजबूत होगा और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी। भविष्य में रेरा अपनी निगरानी प्रणाली को और अधिक डिजिटल और सख्त बनाने की योजना बना रहा है। इससे राज्य में वैध और सुरक्षित आवास परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।
