Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज विधानसभा क्षेत्र में महिलाओं ने शराब की दुकान खोलने के विरोध में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को जब पूरा प्रदेश ‘हिमाचल दिवस’ के उत्सव में डूबा था, तब बस्सी पंचायत की सैकड़ों महिलाएं सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रही थीं। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के गृह क्षेत्र में महिलाओं का यह गुस्सा प्रस्तावित शराब के ठेके को लेकर है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि उन्हें गांव में शराब नहीं, बल्कि रोजगार के नए अवसर चाहिए।
महिला मंडल के नेतृत्व में हुआ जोरदार शक्ति प्रदर्शन
बस्सी पंचायत के टिक्कर क्षेत्र में प्रस्तावित शराब की दुकान के खिलाफ महिलाओं ने संगठित होकर आवाज उठाई है। स्थानीय महिला मंडल की प्रधान पिंकी देवी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रशासन की नीतियों की कड़ी आलोचना की। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना फैसला तत्काल वापस नहीं लिया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगी। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यह लड़ाई केवल एक दुकान के विरोध की नहीं, बल्कि उनके बच्चों के सुरक्षित भविष्य की रक्षा के लिए है।
एसडीएम को दी गई लिखित शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी मांगों को लेकर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। महिलाओं ने जानकारी दी कि उन्होंने 26 दिसंबर 2025 को ही एसडीएम गोहर को इस ठेके के विरोध में एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा था। इसके बावजूद, शराब की दुकान खोलने की प्रक्रिया को रोका नहीं गया, जिससे स्थानीय निवासियों का आक्रोश और भड़क गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन जनता की भावनाओं का सम्मान करने के बजाय शराब माफियाओं के हितों को प्राथमिकता दे रहा है।
स्कूल के पास ठेका खुलने से बच्चों की सुरक्षा पर संकट
महिलाओं ने शराब की दुकान के स्थान को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं व्यक्त की हैं। प्रस्तावित स्थल से मात्र 100 मीटर की दूरी पर एक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल स्थित है, जहां करीब 250 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। यह वही मुख्य मार्ग है जिसका उपयोग बच्चे प्रतिदिन स्कूल आने-जाने के लिए करते हैं। ग्रामीणों को डर है कि शराब की दुकान खुलने से इलाके का शांत माहौल खराब होगा। असामाजिक तत्वों के जमावड़े से स्कूल जाने वाली छात्राओं और बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
पलायन और बेरोजगारी के बीच शराब को बढ़ावा देने का आरोप
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहाड़ों से युवाओं का पलायन एक गंभीर समस्या बन चुका है। युवाओं को रोजगार देने के बजाय गांवों में शराब की दुकानें खोलना समाज को मानसिक और आर्थिक रूप से कमजोर करने जैसा है। महिलाओं का तर्क है कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर अभद्र व्यवहार करने वालों के कारण महिलाओं का घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस संवेदनशील मामले में तुरंत व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
