शिमला के देवता मेले में छुआछूत का खौफनाक सच: क्या आस्था के नाम पर परोसी जा रही है नफरत?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के शिमला से एक बेहद शर्मनाक घटना सामने आई है। चदरा मधान में ‘जय श्री कालवा नाग जी’ की जत्तर में खुलेआम जातिगत भेदभाव हो रहा है। आस्था के इस पावन उत्सव में दलितों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। सवर्ण समाज के लोग अनुसूचित जाति के लोगों को धाम में अलग बिठा रहे हैं। इस भयानक छुआछूत और बहिष्कार के खिलाफ पुलिस और प्रशासन से एफआईआर दर्ज करने की कड़ी मांग की गई है।

भंडारे में भेदभाव और छुआछूत का नंगा नाच

मेले के दौरान आयोजित विशाल धाम में सवर्ण और दलित समुदाय के बीच जानबूझकर भारी दूरी रखी जाती है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह सीधा सामाजिक बहिष्कार का मामला है। भोजन परोसने का जिम्मा केवल ऊंची जाति के लोग संभालते हैं। वे सेवा भाव के बजाय छुआछूत के डर से काम करते हैं। देवता के दरबार में ऐसा अहंकार आधुनिक समाज की मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अन्न की बर्बादी मंजूर लेकिन इंसानियत से परहेज

भेदभाव की सबसे खौफनाक तस्वीर बचे हुए भोजन को लेकर सामने आती है। जब दलित समुदाय का खाना बच जाता है, तो उसे फेंक दिया जाता है। सवर्ण लोग उस अन्न को किसी जरूरतमंद इंसान या बेजुबान जानवर को देना भी पाप समझते हैं। झूठी जातिगत श्रेष्ठता दिखाने के लिए खाने को सीधे नाली में बहा दिया जाता है। इसे आस्था नहीं बल्कि एक गंभीर मानसिक बीमारी माना जा रहा है।

दोषियों के खिलाफ एसटी एक्ट में केस दर्ज करने की मांग

उपमंडल स्तरीय सतर्कता समिति के सदस्य बुद्धि राम जस्टा ने इस अमानवीय कृत्य पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने शिमला के जिला दंडाधिकारी, ठियोग के एसडीएम और पुलिस अधीक्षक को औपचारिक शिकायत भेजी है। इस पत्र में सभी दोषियों के खिलाफ अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की सख्त मांग की गई है। प्रशासन की मौजूदा चुप्पी समाज के लिए बहुत ही घातक साबित हो सकती है।

Report: Budhi Ram Justa

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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