Himachal News: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में एक बेहद दुखद और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नगर निगम में कार्यरत एक कैमिकल इंजीनियर ने पत्नी और ससुराल पक्ष के कथित उत्पीड़न से तंग आकर मौत को गले लगा लिया। अंब के कलरुही क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर मिली लाश के बाद शुरू में इसे महज एक हादसा माना जा रहा था। लेकिन मृतक के पिता के सनसनीखेज आरोपों ने इस पूरी घटना को नया मोड़ दे दिया है।
पत्नी की आपत्तिजनक चैट और ससुरालियों का उत्पीड़न
मृतक इंजीनियर मनीष के पिता राजिंदर ने पुलिस को दी शिकायत में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि मनीष की शादी अप्रैल 2024 में हमीरपुर की रेणुका से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही पति-पत्नी के रिश्तों में कड़वाहट आ गई। विवाद तब और गहरा गया जब मनीष ने अपनी पत्नी के मोबाइल में कुछ आपत्तिजनक चैट्स पकड़ीं। पिता का आरोप है कि इसके बाद ससुराल पक्ष ने मनीष के साथ मारपीट और मानसिक उत्पीड़न शुरू कर दिया।
धमकियों और मानसिक तनाव ने मजबूर किया
राजिंदर ने आरोप लगाया कि ससुरालियों ने हमीरपुर और चंडीगढ़ में मनीष के साथ हाथापाई की थी। उसे दोबारा चंडीगढ़ न आने की गंभीर धमकियां भी दी गई थीं। इन लगातार मिल रही धमकियों और पारिवारिक कलह के कारण मनीष गहरे मानसिक तनाव में रहने लगा था। इसी तनाव के चलते उसने 7 मार्च की सुबह करीब 8 बजे रेलवे ट्रैक पर जाकर जान दे दी। क्रियाकर्म में व्यस्त होने के कारण परिवार ने केस दर्ज कराने में थोड़ी देरी की।
पुलिस ने दर्ज किया सुसाइड के लिए उकसाने का केस
अंब पुलिस ने मृतक के पिता की शिकायत के आधार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने मनीष की पत्नी, सास-ससुर और साली के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। डीएसपी अंब अनिल पटियाल ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब उन आपत्तिजनक चैट्स और प्रताड़ना के दावों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि सच सामने आ सके।
रेलवे ट्रैक पर मिला था 34 वर्षीय मनीष का शव
गौरतलब है कि 34 वर्षीय मुनीष अंब-दौलतपुर रेलवे ट्रैक पर पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आया था। उस समय पुलिस इसे सामान्य दुर्घटना मान रही थी, लेकिन अब मामले ने आपराधिक रूप ले लिया है। मनीष ऊना नगर निगम में कैमिकल इंजीनियर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा था। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर है। पुलिस अब कॉल रिकॉर्ड्स और मोबाइल डेटा खंगाल रही है ताकि उत्पीड़न के ठोस सबूत जुटाए जा सकें।
