Uttarakhand News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हाईवे निर्माण कंपनी की जानलेवा लापरवाही ने दो होनहार छात्रों की जिंदगी छीन ली। प्रेमनगर थाना क्षेत्र में करीब पांच महीने पहले हुए इस दर्दनाक हादसे में अब जाकर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। मुख्यमंत्री दरबार में परिजनों की गुहार के बाद शनिवार को निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई। इस मामले ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और सड़क सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अंधेरे में मौत का ढेर: न बैरिकेडिंग थी न कोई चेतावनी बोर्ड
हादसे का शिकार हुए सक्षम पंथ बीबीए एलएलबी के छात्र थे। वह 30 नवंबर की रात अपने साथी आयुष कौशल के साथ बुलेट से जा रहे थे। जौड़ी गांव के पास एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने सड़क के बीचों-बीच मिट्टी और मलबे का बड़ा ढेर छोड़ा हुआ था। वहां सुरक्षा के लिए न तो बैरिकेडिंग की गई थी और न ही रिफ्लेक्टर लगाए गए थे। अंधेरे के कारण छात्रों की बाइक सीधे मलबे के ढेर पर चढ़कर गड्ढे में जा गिरी।
अस्पताल में जिंदगी की जंग हार गए दोनों होनहार छात्र
दुर्घटना इतनी भीषण थी कि सक्षम पंथ की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, शिमला निवासी उनके दोस्त आयुष कौशल गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आयुष ने कई दिनों तक अस्पताल में मौत से संघर्ष किया, लेकिन अंततः 5 दिसंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया। दो परिवारों के चिराग बुझने के बाद भी प्रशासन महीनों तक मौन साधे रहा। पीड़ित पिता संदीप कुमार पंथ ने न्याय के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाई, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई।
पुलिस की लचर कार्यप्रणाली पर पीड़ित पिता ने उठाए सवाल
सक्षम के पिता संदीप पंथ ने प्रेमनगर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने शुरुआती रिपोर्ट में तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की और सही कारणों का जिक्र नहीं किया। उनके पास दुर्घटना के वीडियो साक्ष्य मौजूद थे, फिर भी पांच महीने तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस निर्माण कंपनी को बचाने का प्रयास कर रही थी। अब प्रेमनगर थाना पुलिस ने एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी पर केस दर्ज किया है।
निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी बन रही जानलेवा
सड़क निर्माण के दौरान लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी प्रेमनगर क्षेत्र के केहरी में निर्माण कार्य के दौरान भारी चूक का मामला सामने आया था। वहां भी पुलिस ने लापरवाही के चलते मुकदमा दर्ज किया था। विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की ढिलाई का खामियाजा निर्दोष नागरिकों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। शासन अब इस मामले में कड़ी जांच और दोषियों को सजा दिलाने की बात कह रहा है।
