Uttarakhand News: चंबा पुलिस ने ढाई करोड़ रुपये की भारी-भरकम धोखाधड़ी के मामले में दो मुख्य वांछित आरोपितों को दबोच लिया है। इन जालसाजों ने एक फर्जी कंपनी की अवैध शाखा खोलकर स्थानीय भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाया था। आरोपितों ने निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये एकत्र किए और फिर गबन कर लिया। पुलिस की इस बड़ी कामयाबी से निवेश के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों में हड़कंप मच गया है।
वित्त मंत्रालय की अनुमति के बिना चल रहा था ठगी का खेल
सितंबर 2025 में चंबा के निवासी कृष्ण स्वरूप ने इस बड़े फर्जीवाड़े के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिलीप सिंह बोहरा, प्यारे राम और सुरेंद्र सिंह नेगी ने ऋषिकेश में ‘बोहरा विकास निधि लिमिटेड’ नाम की कंपनी बनाई थी। बाद में इस खेल में नरेश रावत और सूरजमणि सेमवाल को भी शामिल किया गया। इन लोगों ने बिना वित्त मंत्रालय की मंजूरी के चंबा में अवैध शाखा खोली और जनता की मेहनत की कमाई हड़प ली।
विजिलेंस और पुलिस टीम ने हरिद्वार-देहरादून से दबोचे आरोपित
एसएसपी श्वेता चौबे के सख्त निर्देशों के बाद चंबा थाना प्रभारी विपिन बहुगुणा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन हुआ। पुलिस ने सटीक सूचना के आधार पर शनिवार को हरिद्वार के श्यामपुर से सुरेंद्र सिंह नेगी और ऋषिकेश से नरेश रावत को गिरफ्तार किया। इन दोनों आरोपितों पर पहले से ही कोटद्वार पौड़ी और ऋषिकेश में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस अब इनके अन्य साथियों और वित्तीय लेन-देन के नेटवर्क की तलाश कर रही है।
मासिक अपराध गोष्ठी में बनी थी वांछितों को पकड़ने की रणनीति
इस बड़ी कार्रवाई की नींव एसएसपी द्वारा आयोजित मासिक अपराध गोष्ठी में रखी गई थी। पुलिस कप्तान ने सभी प्रभारियों को लंबित मामलों और फरार अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया था। चंबा पुलिस की सक्रियता से यह मामला सुलझता नजर आ रहा है। जांच में यह भी पुष्टि हुई है कि चंबा स्थित कंपनी की शाखा पूरी तरह अवैध थी। आरोपितों को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
निवेशकों में दहशत, पुलिस ने सतर्क रहने की अपील की
इस घोटाले के सामने आने के बाद इलाके के निवेशकों में डर का माहौल है। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी गैर-पंजीकृत कंपनी में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता की जांच जरूर करें। फर्जी शाखाओं और ‘फिक्स डिपॉजिट’ के लुभावने विज्ञापनों से सावधान रहने की जरूरत है। पुलिस अब उन संपत्तियों का विवरण जुटा रही है जो ठगी की रकम से बनाई गई हैं, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।
