United States News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी आर्थिक नीति को बड़ा विधिक झटका लगा है। एक फेडरल कोर्ट ने ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए 10% ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड की तीन सदस्यीय बेंच ने यह अहम फैसला 2-1 के बहुमत से सुनाया। जजों ने स्पष्ट किया कि प्रशासन के पास 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत इन करों को लागू करने का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था।
कानूनी मापदंडों पर विफल रही ट्रंप सरकार
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सरकार अमेरिका में ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट्स’ के गंभीर संकट को साबित नहीं कर पाई। सेक्शन 122 के तहत राष्ट्रपति को कुछ विशेष परिस्थितियों में ही टैरिफ लगाने की छूट मिलती है। प्रशासन ने बिना कांग्रेस की मंजूरी के सभी आयातों पर शुल्क थोपने की कोशिश की थी। कोर्ट ने माना कि जिस आधार पर यह नीति बनी, वह विधिक रूप से अत्यंत कमजोर थी। इस आदेश से पूरी टैरिफ नीति की साख पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
कंपनियों को वापस लौटाना होगा वसूला गया पैसा
फेडरल कोर्ट ने आदेश दिया है कि जिन पक्षों ने इस नीति के खिलाफ केस किया था, उनसे अब शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार को उन कंपनियों से पहले वसूली गई पूरी रकम भी वापस करनी होगी। हालांकि यह राहत फिलहाल सिर्फ प्रभावित पक्षों तक ही सीमित रखी गई है। अन्य आयातकों के लिए यह टैरिफ आगामी जुलाई तक जारी रह सकते हैं। यह निर्णय ट्रंप प्रशासन के राजस्व संग्रह और व्यापार रणनीति के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट से भी लग चुका है पहले झटका
ट्रंप की टैरिफ नीति को अदालतों में पहले भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इस साल की शुरुआत में फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने भी कई प्रमुख टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद सरकार ने नए विधिक प्रावधानों के तहत कर लगाने की कोशिश की, जो अब दोबारा कानूनी जांच में विफल रहे। ट्रंप प्रशासन अब इस ताजा फैसले को चुनौती देने के लिए ऊपरी अदालत में अपील करने की योजना बना रहा है। व्यापार विशेषज्ञ इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी खबर मान रहे हैं।


