Pakistan News: कूटनीति की दुनिया में अपमान अक्सर खामोशी से और सलीके से किया जाता है। पाकिस्तान इस वक्त ठीक इसी स्थिति का सामना कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की उम्मीद पाले बैठे पाकिस्तान को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सुरक्षा कारणों से इस्लामाबाद नहीं जाएंगे। यह फैसला पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए एक बड़ी कूटनीतिक हार माना जा रहा है।
सुरक्षा के नाम पर ट्रंप ने पाकिस्तान को दिया कड़ा संदेश
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में सुरक्षा चिंताओं को प्रमुख वजह बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस महज 24 घंटे के नोटिस पर सुरक्षा की गारंटी नहीं ले सकती। यह बयान पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर एक सीधा प्रहार है। पाकिस्तान सरकार ने इस दौरे के लिए इस्लामाबाद को पूरी तरह छावनी में बदल दिया था। लेकिन ट्रंप के इस इनकार ने साफ कर दिया कि अमेरिका को पाकिस्तान के सुरक्षा इंतजामों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है।
इस्लामाबाद में ‘कंटेनर राज’ और जनता की भारी परेशानी
पाकिस्तानी हुक्मरानों ने इस दौरे को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। राजधानी में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए और कई फाइव स्टार होटलों को सरकारी नियंत्रण में ले लिया गया। चप्पे-चप्पे पर दस हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी और स्नाइपर तैनात किए गए थे। आम जनता सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर थी। पाकिस्तान दुनिया को अपनी ‘फूलप्रूफ’ सुरक्षा का प्रदर्शन करना चाहता था। हालांकि, जेडी वेंस के न आने के फैसले ने पाकिस्तान के इस ‘सिक्योरिटी पीआर’ की हवा निकाल दी है।
अमेरिकी सीक्रेट सर्विस का भरोसा जीतने में नाकाम रहा सिस्टम
अमेरिकी सीक्रेट सर्विस का 24 घंटे का बहाना दरअसल एक कूटनीतिक तरीका है। वे पाकिस्तान को यह बताना चाहते हैं कि वहां का सिस्टम भरोसेमंद नहीं है। जिस देश में सैन्य ठिकानों के पास ओसामा बिन लादेन छिपा रहा हो, वहां अमेरिका अपने शीर्ष नेता को भेजने का जोखिम नहीं लेना चाहता। यह पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी शर्मिंदगी का विषय है। इससे साबित होता है कि ‘असुरक्षित देश’ होने का ठप्पा आज भी पाकिस्तान के माथे पर मजबूती से लगा हुआ है।
पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख को लगा गहरा धक्का
शहबाज शरीफ सरकार इस आयोजन के जरिए अपनी वैश्विक छवि चमकाने का सपना देख रही थी। वे दुनिया को दिखाना चाहते थे कि पाकिस्तान दो बड़े दुश्मनों के बीच सुलह करा सकता है। लेकिन हकीकत यह निकली कि दुनिया का सबसे ताकतवर देश अपने ‘नंबर टू’ नेता को वहां भेजने से कतरा रहा है। जो देश खुद के मेहमानों को सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता, वह विश्व शांति में क्या भूमिका निभाएगा? यह घटना पाकिस्तान के लिए एक कूटनीतिक डरावने सपने जैसी साबित हुई है।
