दिल्ली मेट्रो का ग्लोबल धमाका: संजय जमुआर बने DMIL के पहले CEO, अब दुनिया भर में दिखेगा DMRC का जलवा!

Delhi News: दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने के लिए एक बड़ी रणनीतिक पहल की है। निगम ने अपनी नई सहायक कंपनी ‘दिल्ली मेट्रो इंटरनेशनल लिमिटेड’ (DMIL) के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में संजय जमुआर की नियुक्ति की है। यह नई इकाई दुनिया भर की मेट्रो परियोजनाओं में भारत की भागीदारी बढ़ाएगी। डीएमआरसी अब विदेशी शहरों में मेट्रो निर्माण, कंसल्टेंसी और संचालन सेवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोलियां लगाएगी।

विदेशी बाज़ारों में भारत की धाक जमाएगी DMIL

डीएमआरसी के अनुसार, नई कंपनी का प्राथमिक उद्देश्य शहरी परिवहन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सलाहकार सेवाएं प्रदान करना है। डीएमआईएल विभिन्न देशों की सरकारी एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों को मेट्रो सिस्टम के विकास और सुधार के लिए विशेषज्ञ सलाह देगी। यह संस्था डीएमआरसी के उन दशकों पुराने अनुभवों का लाभ उठाएगी, जिसके दम पर उसने भारत के परिवहन ढांचे को बदल दिया है। अब भारतीय विशेषज्ञता विदेशी शहरों की सड़कों और पटरियों पर भी दिखाई देगी।

कौन हैं संजय जमुआर और क्या है उनका अनुभव?

नवनियुक्त सीईओ संजय जमुआर के पास भारतीय रेलवे और अंतरराष्ट्रीय परिवहन क्षेत्र का व्यापक अनुभव है। वे भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) के पूर्व अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने अमेरिका, यूके, फ्रांस और यूरोप के कई देशों में काम किया है। जमुआर ने यूके के वारविक बिजनेस स्कूल से रणनीतिक नेतृत्व में विशेषज्ञता हासिल की है। खास बात यह है कि वे 1998 में डीएमआरसी के पहले ऑपरेशन और मेंटेनेंस कर्मचारी थे, इसलिए उनकी नियुक्ति को ‘घर वापसी’ कहा जा रहा है।

ढाका से लेकर पटना तक फैला है सेवाओं का जाल

दिल्ली मेट्रो पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवा चुकी है। फिलहाल डीएमआरसी पड़ोसी देश बांग्लादेश में ढाका मेट्रो के लिए मुख्य कंसल्टेंट के रूप में कार्य कर रही है। भारत के भीतर भी इसने मुंबई, जयपुर और पटना जैसी महत्वपूर्ण मेट्रो परियोजनाओं के निर्माण और परामर्श में अहम भूमिका निभाई है। डीएमआईएल के गठन के बाद यह माना जा रहा है कि दिल्ली मेट्रो अब वैश्विक स्तर पर बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स हासिल करने में अधिक सक्षम होगी।

मजबूत वित्तीय स्थिति और भविष्य की रणनीति

वित्तीय मोर्चे पर भी दिल्ली मेट्रो की स्थिति काफी सुदृढ़ नज़र आ रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में निगम का कुल राजस्व 8,151 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। इसमें से 3,946 करोड़ रुपये टिकटों की बिक्री से और 4,205 करोड़ रुपये विज्ञापन, लीजिंग और कंसल्टेंसी जैसे अन्य स्रोतों से प्राप्त हुए हैं। डीएमआईएल के माध्यम से अब दिल्ली मेट्रो न केवल परिवहन समाधान पेश करेगी, बल्कि भारत के लिए विदेशी मुद्रा अर्जित करने का भी एक बड़ा जरिया बनेगी।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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