गैस सिलेंडर में 993 रुपये का ऐतिहासिक उछाल, विक्रमादित्य सिंह ने बताया चुनाव के बाद का खेल

Himachal News: कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई है। इससे हिमाचल प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था में बड़ी हलचल मच गई है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि गैस के दाम बढ़ने से पर्यटन और कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा। बिटुमिन महंगा होने से सड़कों के निर्माण कार्य भी रुक गए हैं।

चुनावी रणनीति पर खड़े किए बड़े सवाल

लोक निर्माण मंत्री ने गैस की कीमतों में हुई वृद्धि को चुनावी रणनीति का हिस्सा बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने हाल ही में हुए चुनावों के कारण गैस की कीमतें रोके रखी थीं। जैसे ही तीन राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया खत्म हुई, सरकार ने तुरंत कीमतें बढ़ा दीं। कमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब तीन हजार रुपये के पार पहुंच गई है। यह एक ऐतिहासिक और अप्रत्याशित आर्थिक वृद्धि है।

पर्यटन और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा सीधा असर

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर्यटन उद्योग पर निर्भर करती है। अब राज्य में पर्यटन का मुख्य सीजन भी शुरू हो रहा है। विक्रमादित्य सिंह ने स्पष्ट किया कि गैस सिलेंडर महंगा होने से होटल और रेस्टोरेंट का खर्च बढ़ेगा। इसके कारण खाने-पीने की सभी चीजें महंगी हो जाएंगी। छोटे ढाबा संचालकों की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ गई हैं। पांच किलो वाले सिलेंडर की कीमत 549 रुपये से बढ़कर लगभग 810 रुपये तक पहुंच गई है।

बिटुमिन महंगा होने से रुके सड़कों के निर्माण कार्य

मध्य पूर्व के तनाव का असर हिमाचल के विकास पर पड़ रहा है। कच्चे तेल और बिटुमिन की कीमतों में भारी उछाल आया है। इससे प्रदेश पर 70 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। मंत्री ने कहा कि ठेकेदार बढ़ती लागत के कारण काम लेने से बच रहे हैं। इस वजह से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत चल रहे कार्य रुक गए हैं। राज्य सरकार की मांग के बावजूद केंद्र ने अब तक मदद नहीं दी है।

केंद्र सरकार की विदेश नीति पर उठाए कड़े सवाल

मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र की विदेश नीति की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों को नियंत्रित करने में सरकार विफल रही है। इसका सीधा खामियाजा देश की आम जनता भुगत रही है। उन्होंने कहा कि भारत के पास रूस से सस्ता तेल खरीदने का विकल्प मौजूद था। लेकिन सरकार ने अमेरिका के दबाव में आकर सस्ता तेल नहीं खरीदा। उन्होंने विदेश मंत्री की भूमिका पर भी कड़े सवाल उठाए हैं।

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